प्रत्यय की परिभाषा तो आपलोग समझ गए अब यह जान लेते है की प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं।
प्रत्यय के प्रकार
प्रत्यय तीन प्रकार के होते हैं।
संस्कृत के प्रत्यय
हिंदी के प्रत्यय
विदेशी भाषा के प्रत्यय
ऊपर हमने तीन प्रकार के प्रत्यय को बताया है। इसमें से हम हिंदी के प्रत्यय को विस्तृत रूप से पढ़ेंगे। तो चलिए यह जान लेते हैं कि हिंदी प्रत्यय के कितने भेद होते हैं।
प्रत्यय के भेद:-
प्रत्यय के मुख्यतः दो भेद हैं।
1. कृत प्रत्यय
2. तद्धित प्रत्यय
1. कृत प्रत्यय किसे कहते हैं
कृत प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप अर्थात मूल धातु में जुड़ते हैं, कृत् प्रत्यय कहलाते हैं। कृत प्रत्यय से बने शब्दों को कृदंत कहते हैं।
जैसे :-
लेख +अक = लेखक। यहां अक कृत प्रत्यय है तथा लेखक कृदंत शब्द है।
2. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं
तध्दित प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप यानी धातु को छोड़कर अन्य शब्दों- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण व अवयव में जुड़ते हैं तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। तद्धित प्रत्यय से बने शब्द तद्धितांत शब्द का लाते हैं।
जैसे :-
सेठ +आनी= सेठानी। यहां आनी तद्धित प्रत्यय है तथा सेठानी तद्धित शब्द है।
प्रत्यय के कुछ महत्वपूर्ण नोट्स :-
i. प्रत्ययों का अपना कुछ भी अर्थ नहीं होता है और न ही इनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जाता है।
ii. हिंदी के प्रायः सभी प्रत्ययों कृत और तद्धित, संस्कृत के कृत और तद्धित प्रत्यय से ही विकसित हुए हैं।
वर्तमान काल की परिभाषा:- क्रिया का वह रूप जो वर्तमान में चल रहे समय का बोध कराता है, वर्तमान काल कहलाता है।
जैसे :-
पिता जी समाचार सुन रहे हैं।
पुजारी पूजा कर रहा है।
प्रियंका स्कूल जाती हैं।
उपरोक्त वाक्यों में क्रिया का वर्तमान काल ज्ञात किया जा रहा है। अतः ये सभी क्रियाएँ वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।
वर्तमान काल की पहचान क्या है
वर्तमान कल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में 'ता, ती, ते, है, हैं' आदि आते है।
वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं | vartman kal ke bhed
वर्तमान काल के पाँच भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।
सामान्य वर्तमानकाल
तत्कालिक वर्तमानकाल
पूर्ण वर्तमानकाल
संदिग्ध वर्तमानकाल
संभाव्य वर्तमानकाल
i) सामान्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं
क्रिया का वह रूप जिसमें क्रिया वर्तमान काल में होती है, 'सामान्य वर्तमान काल' कहलाती है।
दूसरे शब्दों में- वर्तमान काल में होने वाली क्रिया को सरल वर्तमान काल क्रिया कहते हैं।
जैसे :-
वह आता है।
वह देखता है।
दादी माला जपती हैं।
ii) तत्कालिक वर्तमानकाल किसे कहते हैं
इससे यह पता चलता है कि क्रिया वर्तमानकाल में हो रही है।
जैसे :-
मै पढ़ रहा हूँ।
वह जा रहा है।
iii) पूर्ण वर्तमानकाल किसे कहते हैं
इससे वर्तमानकाल में कार्य की पूर्ण सिद्धि का बोध होता है।
जैसे :-
वह आया है।
सीता ने पुस्तक पढ़ी है।
iv) संदिग्ध वर्तमानकाल किसे कहते हैं
जिसमें क्रिया के अस्तित्व पर संदेह हो, लेकिन वर्तमान काल में उस पर संदेह न हो। इसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं।
सरल शब्दों में- जिस क्रिया का वर्तमान काल में पूरा होना संदेहास्पद होता है, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं
जैसे :-
राम खाता होगा।
वह पढ़ता होगा।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाओं के होने में संदेह है। अतः ये संदिग्ध वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।
v) सम्भाव्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं
इससे वर्तमानकाल में काम के पूरा होने की सम्भवना रहती है।
जैसे :-
वह आया हो।
वह लौटा हो।
2. भूतकाल किसे कहते हैं |bhutkal kise khte hai
भूतकाल की परिभाषा:- क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का ज्ञान होता है, उसे भूतकाल कहते है।
सरल शब्दों में- जिससे क्रिया से कार्य की समाप्ति का बोध होता है, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।
जैसे :-
वह खा चुका था ।
राम ने अपना पाठ याद किया।
मैंने पुस्तक पढ़ ली थी।
उपरोक्त सभी वाक्य कर्म के भूतकाल के होने का आभास दे रहे हैं। तो ये भूतकाल के वाक्य हैं।
भूतकाल की पहचान क्या है
भूतकाल की पहचान के लिए वाक्य के अंत में 'था, था, था' आदि आते हैं।
भूतकाल के कितने भेद हैं | bhutkal ke kitne bhed hote hain
भूतकाल के छह भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।
सामान्य भूतकाल
आसन भूतकाल
पूर्ण भूतकाल
अपूर्ण भूतकाल
संदिग्ध भूतकाल
हेतुहेतुमद् भूत
i) सामान्य भूतकाल की परिभाषा
जिससे भूतकाल की क्रिया के विशिष्ट समय का ज्ञान न हो, इसे सामान्य भूतकाल कहा जाता है।
दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जो भूतकाल में किए गए कार्य के पूरा होने का बोध कराता है, सरल भूतकाल कहलाता है।
जैसे :-
मोहन आया।
सीता गयी।
श्रीराम ने रावण को मारा।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ बीते हुए समय में पूरी हो गई। अतः ये सामान्य भूतकाल की क्रियाएँ हैं।
ii) आसन्न भूतकाल की परिभाषा
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि क्रिया अभी कुछ समय पहले पूरी हुई है, आसन्न भूतकाल कहलाती है।
इसके साथ, कार्रवाई की समाप्ति निकट अतीत में या तुरंत इंगित की जाती है।
जैसे :-
मैने आम खाया हैं।
मैं अभी सोकर उठी हूँ।
अध्यापिका पढ़ाकर आई हैं।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ अभी-अभी पूर्ण हुई हैं। इसलिए ये आसन्न भूतकाल की क्रियाएँ हैं।
iii) पूर्ण भूतकाल की परिभाषा
क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूतकाल कहा जाता है, जो क्रिया के अंत के समय की स्पष्ट बोध देता है कि क्रिया को समाप्त हुए एक लंबा समय बीत चुका है।
क्रिया का वह रूप जो क्रिया के बहुत पहले पूरा होने का संकेत देता है, पूर्ण भूतकाल कहलाता है।
जैसे :
उसने श्याम को मारा था।
अंग्रेजों ने भारत पर राज किया था।
महादेवी वर्मा ने संस्मरण लिखे थे।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया अपने भूतकाल में पूर्ण हुई थी। तो ये पूर्ण भूत काल की क्रियाएं हैं।
पूर्ण भूतकाल में क्रिया के साथ 'था, थी, थे, चुका था, चुकी थी, चुके थे आदि लगता है।
iv) अपूर्ण भूतकाल की परिभाषा
इससे ज्ञात होता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, परन्तु उसके अन्त का पता नहीं है।
जैसे :-
सुरेश गीत गा रहा था।
रीता सो रही थी।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया इंगित करती है कि क्रिया अतीत में शुरू हुई है और अभी तक पूरी नहीं हुई है। तो ये अपूर्ण भूतकाल क्रिया हैं।
v) संदिग्ध भूतकाल की परिभाषा
भूतकाल में क्रिया के जिस रूप में इसके पूरा होने पर संदेह होता है, उसे संदिग्ध भूतकाल कहा जाता है। पूर्व में काम पूरा हुआ या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।
जैसे :-
तू गाया होगा।
बस छूट गई होगी।
दुकानें बंद हो चुकी होगी।
उपरोक्त वाक्यों की क्रिया भूतकाल में कार्य के पूरा होने के बारे में संदेह प्रकट करती है। तो ये संदिग्ध भूतकाल की क्रियाएं हैं।
vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल की परिभाषा
यदि भूतकाल में एक क्रिया के होने या न होने पर दूसरी क्रिया का होना या न होना निर्भर करता है, तो वह हेतुहेतुमद् भूतकाल क्रिया कहलाती है। इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सका।
जैसे :-
यदि तुमने परिश्रम किया होता, तो पास हो जाते।
यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पहली क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया भी पूरी नहीं होती है। अतः ये हेतुहेतुमद् भूतकाल की क्रियाएँ हैं।
3. भविष्य काल किसे कहते हैं | bhavishy kal kise kahate hai
भविष्य काल की परिभाषा:- भविष्य में होने वाली क्रिया को भविष्य काल क्रिया कहते हैं।
दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जिसमें आने वाले समय में कार्य की जानी हो या प्रकट की जानी हो, उसे भविष्य काल कहते हैं।
भविष्य काल के वाक्य जैसे:-
वह कल घर जाएगा।
हम सर्कस देखने जायेंगे।
किसान खेत में बीज बोयेगा।
उपरोक्त वाक्यों की क्रियाओं से पता चलता है कि ये सभी कार्य आने वाले समय में पूरे होंगे। तो ये भविष्य काल की क्रिया हैं।
भविष्य काल की पहचान क्या है
भविष्य काल की पहचान करने के लिए वाक्य के अंत में 'गा, गी, गे' आदि आते हैं।
भविष्य काल के भेद | bhavishya kal ke kitne bhed hote hain
भविष्यतकाल के तीन भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।
सामान्य भविष्यत काल
सम्भाव्य भविष्यत काल
हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल
(i) सामान्य भविष्यत काल की परिभाषा
क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि वह भविष्य में सामान्य रूप से घटित होगा, सरल भविष्य काल कहलाता है। इससे पता चलता है कि यह क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी।
जैसे :-
बच्चे कैरमबोर्ड खेलेंगे।
वह घर जायेगा।
दीपक अख़बार बेचेगा।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया सामान्य रूप से भविष्य के बारे में जानकारी दे रही है। तो ये सरल भविष्य काल क्रिया हैं।
(ii) सम्भाव्य भविष्यत काल की परिभाषा
क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने की संभावना का पता चलता है, उसे सम्भाव्य भविष्यत काल कहते हैं। जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना हो।
जैसे :-
शायद चोर पकड़ा जाए।
परीक्षा में शायद मुझे अच्छे अंक प्राप्त हों।
उपरोक्त वाक्यों में क्रिया भविष्य में होने की संभावना है। यह पूर्ण होगा, यह निश्चित नहीं है। तो ये संभावित भविष्य काल की क्रिया हैं।
(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल की परिभाषा
इसमे एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर करता है।
जैसे:-
वह आये तो मै जाऊ।
वह कमाये तो मैं खाऊँ।
काल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न [FAQ]
Q. काल के कितने भेद होते हैं? Ans. काल के तीन भेद होते हैं।
Q. भूतकाल कितने प्रकार के होते हैं? Ans. भूतकाल के छः भेद होते हैं।
Q. भविष्य काल के कितने भेद होते हैं? Ans. भविष्य काल के तीन भेद होते हैं।
Q. वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं? Ans. वर्तमान काल के पाँच भेद होते हैं।
2. भाववाचक संज्ञा क्या होती है | भाववाचक संज्ञा की परिभाषा
जिस संज्ञा से किसी के गुणों, दोषों, दशा, स्वभाव, भाव आदि के बारे में पता चलता है, वहाँ भाववाचक संज्ञा होता है। अर्थात् किसी वस्तु, पदार्थ या प्राणी की दशा, दोष, भावना आदि को इंगित करने वाला शब्द भाववाचक संज्ञा कहलाता है।
जैसे :- गर्मी, सर्दी, हरियाली, सुख,मिठास, खटास।
3. व्यक्तिवाचक संज्ञा क्या होती है | व्यक्तिवाचक संज्ञा की परिभाषा
वह शब्द जो किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान आदि को दर्शाता है, व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाता है। अर्थात्, जिस संज्ञा से किसी विशेष स्थान, वस्तु या व्यक्ति का नाम जाना जाता है, वह व्यक्तिवाचक संज्ञा होती है।
जैसे :- भारत, दिल्ली, बिहार, गोवा, महेंद्र सिंह धोनी , रामायण ,गीता, महात्मा गाँधी , कल्पना चावला , रामचरितमानस आदि।
4. समूहवाचक संज्ञा क्या होती है | समूह वाचक संज्ञा की परिभाषा
इसे समुदायवाचक संज्ञा भी कहा जाता है। जिन संज्ञा शब्दों से किसी समूह या समुदाय का बोध होता है, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। अथार्त जो शब्द किसी विशेष या समान वस्तुओं के समूह या एक ही वर्ग या जाति के समूह को संदर्भित करता है। वहाँ पर समूहवाचक संज्ञा होती है।
जैसे :- विद्यार्थियों का समूह , भीड़ , गेंहू का ढेर, लकड़ी का गट्ठर सेना, खेल आदि।
5. द्रव्यवाचक संज्ञा क्या होती है | द्रव्यवाचक संज्ञा की परिभाषा
जो संज्ञा शब्द जो किसी पदार्थ या धातु को इंगित करते हैं उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। अथार्त ऐसे शब्द जो किसी पदार्थ, धातु और पदार्थ को संदर्भित करते हैं वहाँ पर द्रव्यवाचक संज्ञा होती है।