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हेल्लो दोस्तों! इस लेख में हम कारक (karak) किसे कहते हैं तथा कारक कितने प्रकार के होते हैं इत्यादि के बारे में जानेंगे। तो चलिए सबसे पहले कारक की परिभाषा जान लेते हैं।

कारक किसे कहते हैं | karak kise khte hain

कारक की परिभाषा- संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रुप में वाक्य के अन्य शब्दों के साथ संज्ञा अथवा सर्वनाम का संबंध सूचित हो, उसे कारक कहते हैं।

कारक (karak) किसे कहते हैं | कारक कितने प्रकार के होते हैं

कारक के भेद | karak ke kitne bhed hain

कारक आठ प्रकार के होते हैं।

  1. कर्ता कारक
  2. कर्म कारक
  3. करण कारक
  4. संप्रदान कारक
  5. अपादान कारक
  6. संबंध कारक
  7. अधिकरण कारक
  8. संबोधन कारक


  • कारक------- (चिह्न)
  • कर्ता कारक------- ने
  • कर्म कारक ------- को
  • करण कारक------- से
  • संप्रदान कारक------- को, के लिए
  • अपादान कारक------- से, अलगहोना
  • संबंध कारक------- का, की, के, रा, री, रे
  • अधिकरण कारक------- में, पर
  • संबोधन कारक------- हे !, अरे !
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प्रत्यय : क्या आप प्रत्यय की परिभाषा खोज रहे हैं? तो इस लेख को पूरा पढ़िए, क्योंकि इस लेख में प्रत्यय से जुड़ी सभी जानकारी का विस्तृत वर्णन किया गया है। चलिये सबसे पहले यह जान लेते हैं कि प्रत्यय किसे कहते हैं।


प्रत्यय किसे कहते हैं?

प्रत्यय की परिभाषा- वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में लगकर उनके अर्थ को बदल देते है, प्रत्यय कहलाते हैं।

प्रत्यय के उदाहरण :-

  • सब्जी + वाला = सब्जीवाला
  • लिखा + आवत = लिखावट

प्रत्यय किसे कहते हैं?


प्रत्यय की परिभाषा तो आपलोग समझ गए अब यह जान लेते है की प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं।

प्रत्यय के प्रकार

प्रत्यय तीन प्रकार के होते हैं।

  1. संस्कृत के प्रत्यय
  2. हिंदी के प्रत्यय 
  3. विदेशी भाषा के प्रत्यय


ऊपर हमने तीन प्रकार के प्रत्यय को बताया है। इसमें से हम हिंदी के प्रत्यय को विस्तृत रूप से पढ़ेंगे। तो चलिए यह जान लेते हैं कि हिंदी प्रत्यय के कितने भेद होते हैं।

प्रत्यय के भेद:-

प्रत्यय के मुख्यतः दो भेद हैं।

1. कृत प्रत्यय

2. तद्धित प्रत्यय


1. कृत प्रत्यय किसे कहते हैं

कृत प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप अर्थात मूल धातु में जुड़ते हैं, कृत् प्रत्यय कहलाते हैं।  कृत प्रत्यय से बने शब्दों को कृदंत कहते हैं।

जैसे :-

लेख +अक = लेखक। यहां अक कृत प्रत्यय है तथा लेखक कृदंत शब्द है।


2. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं

तध्दित प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप यानी धातु को छोड़कर अन्य शब्दों- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण व अवयव में जुड़ते हैं तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। तद्धित प्रत्यय से बने शब्द तद्धितांत शब्द का लाते हैं।

जैसे :-

सेठ +आनी= सेठानी। यहां आनी तद्धित प्रत्यय है तथा सेठानी तद्धित शब्द है।


प्रत्यय के कुछ महत्वपूर्ण नोट्स :-

i. प्रत्ययों का अपना कुछ भी अर्थ नहीं होता है और न ही इनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जाता है।

ii. हिंदी के प्रायः सभी प्रत्ययों कृत और तद्धित, संस्कृत के कृत और तद्धित प्रत्यय से ही विकसित हुए हैं।

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हेल्लो दोस्तों! आज हम 'काल' के बारे में जानेंगे। क्या आप जानते हैं, काल किसे कहते हैं, काल के कितने भेद होते हैं। इस लेख में हम इन सभी के बारे में विस्तार से जानेंगे। तो चलिए सबसे पहले काल की परिभाषा जान लेते हैं।

काल किसे कहते हैं | Kal kise kahate hain

काल की परिभाषा- क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उसे 'काल' कहते है।

दूसरे शब्दों में- क्रिया के उस रूप को काल कहते हैं, जो उसके कार्य के समय और उसकी पूर्ण या अपूर्ण अवस्था का बोध कराता है।

जैसे :-
  •  बच्चे खेल रहे हैं। 
  •  बच्चे खेल रहे थे। 
  •  बच्चे खेलेंगे। 

  • पहले वाक्य में क्रिया वर्तमान समय में हो रही है। 
  • जैसे - (मैडम पढ़ा रही हैं।)

  • दूसरे वाक्य में क्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
  • जैसे - (मैडम पढ़ा रही थी।)

  • और तीसरे वाक्य में क्रिया भविष्य में होगी।  
  • जैसे - (मैडम पढ़ायेंगी।)

इन वाक्यों की क्रियाएँ कार्य के समय को दर्शाती हैं।

काल किसे कहते हैं

काल के कितने भेद होते हैं | kaal ke bhed

काल के निम्न तीन भेद होते है।

  1. वर्तमान काल - जो समय चल रहा है।
  2. भूतकाल - जो समय बीत चुका है।
  3. भविष्यत काल- जो समय आने वाला है।

1. वर्तमान काल | vartman kal kise kahate hain

वर्तमान काल की परिभाषा:- क्रिया का वह रूप जो वर्तमान में चल रहे समय का बोध कराता है, वर्तमान काल कहलाता है।

जैसे :-

  • पिता जी समाचार सुन रहे हैं।
  • पुजारी पूजा कर रहा है।
  • प्रियंका स्कूल जाती हैं।

उपरोक्त वाक्यों में क्रिया का वर्तमान काल ज्ञात किया जा रहा है।  अतः ये सभी क्रियाएँ वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

वर्तमान काल की पहचान क्या है

वर्तमान कल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में 'ता, ती, ते, है, हैं' आदि आते है।


वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं | vartman kal ke bhed

वर्तमान काल के पाँच भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य वर्तमानकाल
  2. तत्कालिक वर्तमानकाल
  3. पूर्ण वर्तमानकाल
  4. संदिग्ध वर्तमानकाल
  5. संभाव्य वर्तमानकाल

i) सामान्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं

क्रिया का वह रूप जिसमें क्रिया वर्तमान काल में होती है, 'सामान्य वर्तमान काल' कहलाती है।

दूसरे शब्दों में- वर्तमान काल में होने वाली क्रिया को सरल वर्तमान काल क्रिया कहते हैं।

जैसे :-
  • वह आता है।
  • वह देखता है।
  • दादी माला जपती हैं।

ii) तत्कालिक वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे यह पता चलता है कि क्रिया वर्तमानकाल में हो रही है।

जैसे :-
  • मै पढ़ रहा हूँ।
  • वह जा रहा है।

iii) पूर्ण वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे वर्तमानकाल में कार्य की पूर्ण सिद्धि का बोध होता है।

जैसे :-
  • वह आया है।
  • सीता ने पुस्तक पढ़ी है।

iv) संदिग्ध वर्तमानकाल किसे कहते हैं

जिसमें क्रिया के अस्तित्व पर संदेह हो, लेकिन वर्तमान काल में उस पर संदेह न हो।  इसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं।

सरल शब्दों में- जिस क्रिया का वर्तमान काल में पूरा होना संदेहास्पद होता है, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं

जैसे :-
  • राम खाता होगा।
  • वह पढ़ता होगा।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाओं के होने में संदेह है। अतः ये संदिग्ध वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

v) सम्भाव्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे वर्तमानकाल में काम के पूरा होने की सम्भवना रहती है।

जैसे :-
  • वह आया हो।
  • वह लौटा हो।


2. भूतकाल किसे कहते हैं |bhutkal kise khte hai

भूतकाल की परिभाषा:- क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का ज्ञान होता है, उसे भूतकाल कहते है।

सरल शब्दों में- जिससे क्रिया से कार्य की समाप्ति का बोध होता है, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।

जैसे :-

  • वह खा चुका था ।
  • राम ने अपना पाठ याद किया।
  • मैंने पुस्तक पढ़ ली थी।

उपरोक्त सभी वाक्य कर्म के भूतकाल के होने का आभास दे रहे हैं। तो ये भूतकाल के वाक्य हैं।

भूतकाल की पहचान क्या है 

भूतकाल की पहचान के लिए वाक्य के अंत में 'था, था, था' आदि आते हैं।

भूतकाल के कितने भेद हैं | bhutkal ke kitne bhed hote hain

भूतकाल के छह भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।
  1. सामान्य भूतकाल
  2. आसन भूतकाल
  3. पूर्ण भूतकाल
  4. अपूर्ण भूतकाल
  5. संदिग्ध भूतकाल
  6. हेतुहेतुमद् भूत

i) सामान्य भूतकाल की परिभाषा

जिससे भूतकाल की क्रिया के विशिष्ट समय का ज्ञान न हो, इसे सामान्य भूतकाल कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जो भूतकाल में किए गए कार्य के पूरा होने का बोध कराता है, सरल भूतकाल कहलाता है।

जैसे :-

  • मोहन आया।
  • सीता गयी।
  • श्रीराम ने रावण को मारा।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ बीते हुए समय में पूरी हो गई। अतः ये सामान्य भूतकाल की क्रियाएँ हैं।


ii) आसन्न भूतकाल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि क्रिया अभी कुछ समय पहले पूरी हुई है, आसन्न भूतकाल कहलाती है।

इसके साथ, कार्रवाई की समाप्ति निकट अतीत में या तुरंत इंगित की जाती है।

जैसे :-

  • मैने आम खाया हैं।
  • मैं अभी सोकर उठी हूँ।
  • अध्यापिका पढ़ाकर आई हैं।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ अभी-अभी पूर्ण हुई हैं। इसलिए ये आसन्न भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

iii) पूर्ण भूतकाल की परिभाषा

क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूतकाल कहा जाता है, जो क्रिया के अंत के समय की स्पष्ट बोध देता है कि क्रिया को समाप्त हुए एक लंबा समय बीत चुका है।

क्रिया का वह रूप जो क्रिया के बहुत पहले पूरा होने का संकेत देता है, पूर्ण भूतकाल कहलाता है।

जैसे :

  • उसने श्याम को मारा था।
  • अंग्रेजों ने भारत पर राज किया था।
  • महादेवी वर्मा ने संस्मरण लिखे थे।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया अपने भूतकाल में पूर्ण हुई थी।  तो ये पूर्ण भूत काल की क्रियाएं हैं।

पूर्ण भूतकाल में क्रिया के साथ 'था, थी, थे, चुका था, चुकी थी, चुके थे आदि लगता है।

iv) अपूर्ण भूतकाल की परिभाषा

इससे ज्ञात होता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, परन्तु उसके अन्त का पता नहीं है।

जैसे :-

  • सुरेश गीत गा रहा था।
  • रीता सो रही थी।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया इंगित करती है कि क्रिया अतीत में शुरू हुई है और अभी तक पूरी नहीं हुई है।  तो ये अपूर्ण भूतकाल क्रिया हैं।

v) संदिग्ध भूतकाल की परिभाषा

भूतकाल में क्रिया के जिस रूप में इसके पूरा होने पर संदेह होता है, उसे संदिग्ध भूतकाल कहा जाता है।
पूर्व में काम पूरा हुआ या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।

जैसे :-

  • तू गाया होगा।
  • बस छूट गई होगी।
  • दुकानें बंद हो चुकी होगी।
उपरोक्त वाक्यों की क्रिया भूतकाल में कार्य के पूरा होने के बारे में संदेह प्रकट करती है।  तो ये संदिग्ध भूतकाल की क्रियाएं हैं।

vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल की परिभाषा

यदि भूतकाल में एक क्रिया के होने या न होने पर दूसरी क्रिया का होना या न होना निर्भर करता है, तो वह हेतुहेतुमद् भूतकाल क्रिया कहलाती है। इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सका।

जैसे :-

  • यदि तुमने परिश्रम किया होता, तो पास हो जाते।
  • यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पहली क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया भी पूरी नहीं होती है। अतः ये हेतुहेतुमद् भूतकाल की क्रियाएँ हैं।


3. भविष्य काल किसे कहते हैं | bhavishy kal kise kahate hai

भविष्य काल की परिभाषा:- भविष्य में होने वाली क्रिया को भविष्य काल क्रिया कहते हैं।

दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जिसमें आने वाले समय में कार्य की जानी हो या प्रकट की जानी हो, उसे भविष्य काल कहते हैं।

भविष्य काल के वाक्य जैसे:-

  • वह कल घर जाएगा।
  • हम सर्कस देखने जायेंगे।
  • किसान खेत में बीज बोयेगा।

उपरोक्त वाक्यों की क्रियाओं से पता चलता है कि ये सभी कार्य आने वाले समय में पूरे होंगे।  तो ये भविष्य काल की क्रिया हैं।

भविष्य काल की पहचान क्या है

भविष्य काल की पहचान करने के लिए वाक्य के अंत में 'गा, गी, गे' आदि आते हैं।


भविष्य काल के भेद | bhavishya kal ke kitne bhed hote hain

भविष्यतकाल के तीन भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य भविष्यत काल
  2. सम्भाव्य भविष्यत काल
  3. हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल


(i) सामान्य भविष्यत काल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि वह भविष्य में सामान्य रूप से घटित होगा, सरल भविष्य काल कहलाता है।  इससे पता चलता है कि यह क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी।

जैसे :-

  • बच्चे कैरमबोर्ड खेलेंगे।
  • वह घर जायेगा।
  • दीपक अख़बार बेचेगा।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया सामान्य रूप से भविष्य के बारे में जानकारी दे रही है।  तो ये सरल भविष्य काल क्रिया हैं।


(ii) सम्भाव्य भविष्यत काल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने की संभावना का पता चलता है, उसे सम्भाव्य भविष्यत काल कहते हैं। जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना हो।

जैसे :-

  • शायद चोर पकड़ा जाए।
  • परीक्षा में शायद मुझे अच्छे अंक प्राप्त हों।


उपरोक्त वाक्यों में क्रिया भविष्य में होने की संभावना है।  यह पूर्ण होगा, यह निश्चित नहीं है।  तो ये संभावित भविष्य काल की क्रिया हैं।


(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल की परिभाषा

इसमे एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर करता है।

जैसे:-

  • वह आये तो मै जाऊ।
  • वह कमाये तो मैं खाऊँ।


काल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न [FAQ]

Q. काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. काल के तीन भेद होते हैं।

Q. भूतकाल कितने प्रकार के होते हैं?
Ans. भूतकाल के छः भेद होते हैं।

Q. भविष्य काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. भविष्य काल के तीन भेद होते हैं।

Q. वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. वर्तमान काल के पाँच भेद होते हैं।
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हेलो दोस्तों! क्या आप जानते है विशेषण (visheshan) क्या है, विशेषण की परिभाषा क्या है। विशेषण के कितने भेद हैं इत्यादि। आज के इस लेख में हम विशेषण से जुड़े इन सभी topic पर चर्चा करेंगे।

विशेषण किसे कहते हैं | visheshan kua hai

विशेषण की परिभाषा - विशेषण वे शब्द  हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषताओं (गुण, दोष, संख्या, मात्रा, आदि) का वर्णन करते हैं।

जैसे :-

मोटा, काला, सुन्दर, बड़ा आदि।

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नमस्ते मित्रों! इस लेख में आपको सर्वनाम (sarvanam) किसे कहते है, सर्वनाम की परिभाषा, सर्वनाम के भेद के बारे में बताया गया है। जो परीक्षाओं में पूछे जाते हैं। दोस्तों ऐसे ही और महत्वपूर्ण जानकारी और competitive exam से रिलेटेड study मटेरियल Hindi में पढ़ सकते हैं।


सर्वनाम (sarvanam) किसे कहते हैं | सर्वनाम की परिभाषा

संज्ञा के बदले प्रयोग करने वाले शब्द को सर्वनाम (sarvanam) कहते हैं।

अर्थात "सर्वनाम" वे शब्द हैं जो सभी नामों (संज्ञा) के बदले पर प्रयोग किये जाते हैं, या हो सकते हैं, उन्हें सर्वनाम कहते हैं।

सर्वनाम के उदाहरण :- आप, वह, तुम, मैं, वे तू आदि।

सर्वनाम (sarvanam) किसे कहते है | सर्वनाम की परिभाषा


सर्वनाम के कितने भेद हैं | सर्वनाम के भेद | sarvanam ke bhed

सर्वनाम के मुख्य छः भेद होते है।

  1. पुरुषवाचक सर्वनाम
  2. निश्चयवाचक सर्वनाम
  3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  4. संबंधवाचक सर्वनाम
  5. प्रश्नवाचक सर्वनाम
  6. निजवाचक सर्वनाम


1. पुरुषवाचक सर्वनाम

पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं।

  1. उत्तम पुरुष
  2. मध्यम पुरुष
  3. अन्य पुरुष

पुरुषवाचक सर्वनाम के उदाहरण

उत्तम पुरुष - मैं, मेरा, मैंने, हमने, हम, हमारा, मेरा, मुझे, मुझको।

मध्यम पुरुष- तुम, तुमको, तुमसे, तुमने, तुम्हें, आपको, आपने, तू, तुझे, तूने।

अन्य पुरुष- उन्हें, उनको, उनसे, इससे, उसको, वे, वह, यह, ये, उन, इन।


2.निश्चयवाचक सर्वनाम की परिभाषा

जिस शब्द से किसी व्यक्ति या वस्तु का बोध हो, उसे निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

निश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण

यह,वह,ये,वे।

वह यह मेरी पुस्तक है,

यह मेरे हथियार हैं,

वह उनकी मेज है,

वे तुम्हारे आदमी है।


3.अनिश्चयवाचक सर्वनाम:-

जिन सर्वनामों से किसी निश्चित वस्तु का बोध न हो उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम का उदाहरण

कोई, कुछ

कोई आया तो क्या करोगे, उसने कुछ नहीं किया।


4. संबंधवाचक सर्वनाम:-

वे सर्वनाम जिससे दूसरे सर्वनाम का सम्बन्ध ज्ञात होता है, उसे सम्बन्धवाचक सर्वनाम कहते हैं।

संबंधवाचक सर्वनाम का उदाहरण

जो आया है सो जायेगा यह परम सत्य है।


5. प्रश्नवाचक सर्वनाम:-

वे सर्वनाम जिनका उपयोग प्रश्न करने के लिए किया जाता है प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं।

प्रश्नवाचक सर्वनाम का उदाहरण

कौन, क्या

कौन आया है

वह क्या कह रहा था

दूध में क्या गिर पड़ा।


6. निजवाचक सर्वनाम:-

व्यक्तिगत सर्वनाम 'आप' है।  वे सर्वनाम जो "स्वयं के लिए" या अपने आप के लिए उपयोग किए जाते हैं।  व्यक्तिगत सर्वनाम कहलाता है।

निजवाचक सर्वनाम का उदाहरण

यह कार्य अपने आप ही कर लूंगा।

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हेलो दोस्तों अगर आप संज्ञा के बारे में जानना चाहते हैं कि संज्ञा किसे कहते हैं, संज्ञा की परिभाषा, संज्ञा के भेद तो आप इस लेख में इन सभी के बारे में बताया गया है जिसे आप नीचे पड़ सकते हैं।

 संज्ञा (Sangya) किसे कहते हैं | संज्ञा की परिभाषा

किसी व्यक्ति, वस्तु, गुण, प्राणी व जाति, स्थान (जगह), क्रिया और भाव आदि के नाम को संज्ञा कहा जाता है।

जैसे :- 

  • मानव, पशु, पक्षी, (जाति व प्राणी),
  • कोलकाता, दिल्ली, मंदिर, मस्जिद (स्थान व जगह), 
  • पापा, मम्मी, दादा, दादी, मोहन, नीता (व्यक्ति),
  • फोन, कम्प्यूटर, पेन, किताब, साइकिल (वस्तु), 
  • क्रोध करना, हँसना, रोना, गाना (भाव), 
  • आकर्षक, सुन्दर, खराब, साफ सुथरा (गुण), 
  • सीखना, भागना, खाना, पढ़ना, मारना-पीटना (क्रिया) 

संज्ञा की परिभाषा : sangya kise kahate hain


संज्ञा के कितने भेद होते हैं। | Sangya ke bhed

संज्ञा के भेद :-

संज्ञा के पाँच भेद होते है।

1. जातिवाचक संज्ञा

2. भाववाचक संज्ञा

3. व्यक्तिवाचक संज्ञा

4.समूहवाचक संज्ञा

5. द्रव्यवाचक संज्ञा


1. जातिवाचक संज्ञा क्या होती है | जातिवाचक संज्ञा की परिभाषा

जिस शब्द से एक ही जाति के अनेक प्राणियों और वस्तुओं का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं, अर्थात 

वह शब्द जो किसी जाति की पूरी समझ देता है, वह पूरी श्रेणी और पूरे वर्ग का ज्ञान होता है, वह शब्द  को जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है।

जैसे :-  टीवी, पहाड़, तालाब, मोटर साइकिल, कार, लडकी, घोडा, शेर, गॉंव, लड़का।


2. भाववाचक संज्ञा क्या होती है | भाववाचक संज्ञा की परिभाषा

जिस संज्ञा से किसी के गुणों, दोषों, दशा, स्वभाव, भाव आदि के बारे में पता चलता है, वहाँ भाववाचक संज्ञा होता है।  अर्थात् किसी वस्तु, पदार्थ या प्राणी की दशा, दोष, भावना आदि को इंगित करने वाला शब्द  भाववाचक संज्ञा कहलाता है।

जैसे :- गर्मी, सर्दी, हरियाली, सुख,मिठास, खटास।


3. व्यक्तिवाचक संज्ञा क्या होती है | व्यक्तिवाचक संज्ञा की परिभाषा

वह शब्द जो किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान आदि को दर्शाता है, व्यक्तिवाचक संज्ञा कहलाता है।  अर्थात्, जिस संज्ञा से किसी विशेष स्थान, वस्तु या व्यक्ति का नाम जाना जाता है, वह व्यक्तिवाचक संज्ञा होती है।

जैसे :- भारत, दिल्ली, बिहार, गोवा, महेंद्र सिंह धोनी , रामायण ,गीता, महात्मा गाँधी , कल्पना चावला , रामचरितमानस आदि।


4. समूहवाचक संज्ञा क्या होती है | समूह वाचक संज्ञा की परिभाषा

इसे समुदायवाचक संज्ञा भी कहा जाता है। जिन संज्ञा शब्दों से किसी समूह या समुदाय का बोध होता है, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। अथार्त जो शब्द किसी विशेष या समान वस्तुओं के समूह या एक ही वर्ग या जाति के समूह को संदर्भित करता है। वहाँ पर समूहवाचक संज्ञा होती है।

जैसे :- विद्यार्थियों का समूह , भीड़ , गेंहू का ढेर, लकड़ी का गट्ठर  सेना, खेल आदि।


5. द्रव्यवाचक संज्ञा क्या होती है | द्रव्यवाचक संज्ञा की परिभाषा

जो संज्ञा शब्द जो किसी पदार्थ या धातु को इंगित करते हैं उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं। अथार्त ऐसे शब्द जो किसी पदार्थ, धातु और पदार्थ को संदर्भित करते हैं वहाँ पर द्रव्यवाचक संज्ञा होती है।

जैसे :- सोना, चाँदी, दही , गेंहू , तेल, पानी, स्टील , घी, लकड़ी आदि।


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