Hindi OS -->
Professional Themes

Showing themes that are Seo, fast loading, light, fresh and professional.

Explore Our Collection

Browse through our gallery of expertly-crafted themes to find the perfect one for your needs.

अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा- हेल्लो दोस्तों! Welcome to hindi OS. पिछले आर्टिकल में हमने मुहावरे का अर्थ तथा विशेषता के बारे में जान चुके है इसलिए इस आर्मेंटिकल में वर्ड के अनुसार अ से औ तक के वर्ण से बनने वाले मुहावरे को पढ़ेंगे


अ से औ तक वर्ण क्रमानुसार मुहावरे

अ से बनने वाले मुहावरे 

यहाँ पर मुहावरे  उसके बाद अर्थ फिर वाक्य प्रयोग क्रम से दिया गया है

  • अंधे की लकड़ी – (एकमात्र सहारा) – मानव अपने माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी है ।

  • अक्ल पर पत्थर पड़ना – (बुद्धि नष्ट होना) – मुसीबत आने पर मनुष्य की अक्ल पर पत्थर पड़ जाते हैं ।

  • अपना उल्लू सीधा करना – (अपना स्वार्थ पूरा करना) – अरुण को तो अपना उल्लू सीधा करना था , अब वह तुषार से बात भी नहीं करता ।

  • अपना सा मुंह लेकर रह जाना – (असफलता प्राप्त होना) – जब वह अपना काम पूरा ना कर सका तो मालिक के समने वह अपना सा मुंह लेकर रह गया ।


  • अरमान निकालना – (इच्छा पूरी करना) – बेटे की शादी में बाबु साहब ने अपने दिल के अरमान निकाले ।

  • अरमान रहना – (इच्छा पूरी न होना) – पुत्र के मर जाने से गरीब के सारे अरमान रह गये 

  • अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनना – (स्वं अपनी प्रशंसा करना) – अच्छे आदमियों को अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनाना शोभा नहीं देता ।

  • अक्ल का चरने जाना – (समझ का आभाव होना) – इतना भी समझ नहीं सके , क्या अक्ल चरने गई है ।

  • अपने पैरों पर खड़ा होना – (आत्मनिर्भर होना) – व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़े होकर काम करना चाहिए ।

  • अंगूठा दिखाना – (समय पर धोका देना) – मैंने सचिन से कुछ पैसे मांगे तो उसने मुझे अंगूठा दिखा दिया ।

  • अक्ल का अँधा – (मूर्ख) – राज अक्ल का अँधा है , वह किसी के समझाने से मानता ही नहीं है ।


  • अंक भरना – (प्यार से गले लगा लेना) – माँ ने बेटी को देखते ही अंक भर लिया ।

  • अंग टूटना – (बहुत थक जाना) – ज्यादा काम करने से मेरे तो अंग टूटने लगे हैं ।

  • अंगारों पर लेटना – (दुःख सहना) – वह दूसरे की तरक्की देखकर अंगारों पर लोटने लगा ।
  • अपना राग अलापना – (अपनी ही बातें करते रहना) – मैं उससे मदद मांगने गया था , परन्तु वह अपना ही राग अलापता रहा ।

  • अँधेरे घर का उजियारा – (इकलौता पुत्र) – राम इसलिए अधिक लाडला पुत्र है क्योंकि वही इस अँधेरे घर का उजियारा है ।

  • अक्ल का दुश्मन – (मूर्ख) – अरे! अक्ल के दुश्मन , यदि जीवन में सफलता पानी है तो मेहनत करो ।

  • अक्ल की दुम – (खुद को होशियार समझनेवाला) – तुम्हे दस का पहाडा तो आता है नहीं और खुद को साइंस का टॉपर कहते हो ।

  • अंचरा पसारना – (माँगना) – माँ ने अपने बेटे की तरक्की के लिए भगवान के सामने अंचरा पसार लिया ।

  • अण्टी मारना – (चाल चलना) – ऐसी अण्टीमारो कि सब चारों खाने चित हो जाए ।

  • अण्ड-बण्ड कहना – (भला-बुरा कहना) – तुम क्या अण्ड-बण्ड ख रहे हो कोई सुन लेगा तो बहुत पिटेगा ।

  • अन्धाधुन्ध लुटाना – (बिना सोचे खर्च करना) – अपनी कमाई को कोई भी अन्धाधुन्ध लुटाया नहीं करते ।

  • अन्धा बनना – (आगे-पीछे कुछ नहीं देखना) – धर्म के पीछे अँधा नहीं बनना चाहिए ।

  • अढाई दिन की हुकुमत -( कुछ ही दिन की शानोशौकत) – जरा होशियार रहें ये अढाई दिन की हुकुमत है जल्दी चली जाएगी ।

  • अन्न जल उठाना – (मरना) – मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा यहाँ से अन्न जल उठ गया है ।

  • अन्न जल करना – (जलपान करना) – बहुत दिनों बाद आये हो कुछ अन्न जल तो कर लेते ।

  • अन्न लगना – (स्वस्थ रहना) – उसे तो अपने गाँव का ही अन्न लगता है ।

  • अपना किया पाना – (कर्म का फल भोगना ) – जब बेकार लोगों से नाता रखोगे तो अपना किया ही पाओगे ।
  • अन्धा बनाना – (धोखा देना) – लोगों ने ही लोगों को अँधा बना रखा है ।

  • अँधा होना – (विवेकभ्रष्ट होना) – तुम अंधे हो गये हो क्या यह भी नहीं देखते कि कोई खड़ा है या नहीं ।

  • अंधेरखाता – (अन्याय होना) – मुंहमांगा देने पर भी लोग अन्याय करते हैं यह कैसा अन्धेरखाता है ।

  • अंधेर नगरी – (जहाँ कपट का बोलबाला हो) – पहले चाय इकन्नी में मिलती थी और अब दस पैसे की मिलती है ये बाजार नहीं अंधेर नगरी है ।

  • अकेला दम – (अकेला होना) – मैं तो अकेला हूँ जिधर सींग समायेगा , चल दूंगा ।

  • अगले जमाने का आदमी – (ईमानदार व्यक्ति) – आज की दुनिया में अगले जमाने का आदमी बुद्ध माना जाता है ।

  • अब तब करना – (बहाना बनाना) – मैने उससे कुछ माँगा तो उसने अब तब करना शुरू क्र दिया ।

  • अब तब होना – (परेशान करना) – दवाई देने से कोई फायदा नहीं वह तो अब तब हो रहा है ।

आ से बनने वाले मुहावरे 

  • आँखों पर चढना – (कुछ पसंद आ जाना) – तुम्हारी घड़ी चोर की आँखों पर चढ़ गई इसलिए उसने चुरा ली ।

  • आँखों में पानी न होना – (बेशर्म होना) – बेईमान लोगों की आँखों में पानी नहीं होता ।

  • आँखों में खून उतरना – (अत्यधिक क्रोधित होना) – विजय को देखते ही धर्मराज की आँखों में खून उतर आया ।
  • आँखें सेकना – (दूसरों की लड़ाई से आनन्द लेना) – हमारी लड़ाई को देखकर सभी लोग अपनी आँखें सेकते हैं ।


  • आँख उठाकर न देखना – (ध्यान न देना) – श्याम किसी को आंख उठाकर नहीं देखता है ।

  • आँख का कांटा होना – (शत्रु होना) – बुरा काम करने की वजह से वह आस-पडोस वालों की आँख का कांटा हो गया है ।

  • आँख का काजल चुराना – (सफाई के साथ काम करना) – बहुत सारे लोगों के बीच से घडी का चोरी होना ऐसा लगता है जैसे चोर ने आँखों से काजल चुरा लिया ।

  • आँखों में गड़ना – (बुरा लगना) – मेरी बातें उसकी आँखों में गड़ गई ।

  • आँखों में चर्बी छाना – (घमंड होना) – जिसके पास दौलत होती है उसकी आँखों में चर्बी छा जाती है ।

  • आँखें लाल करना – (गुस्से से देखना) – सुंदर की बातों का बुरा मान क्र उसने आँखें लाल कर लीं ।

  • आवाज उठाना – (विरोध करना ) – गुंडों के खिलाफ आवाज उठाना आम बात नहीं है ।
  • आग लगने पर कुआँ खोदना – (मुसीबत आने पर मुसीबत का हल ढूँढना) – अंतिम घडी में शहर से डॉक्टर बुलाना आग लगने पर कुआँ खोदने के समान है ।

  • आटा गीला करना – (घाटा आना) – कम कीमत में फसल बेचोगे तो आटा तो गीला होगा ही ।

  • आधा तीतर आधा बटेर – (बेढंगा) – पश्चिमी संस्क्रती ने भारतीय संस्क्रती को आधा तीतर आधा बटेर बना दिया ।

  • आबरू पर पानी फिरना – (प्रतिष्ठा बर्बाद होना) – तुम्हारी नादानी के कारण ही हमारी आबरू पर पानी फिर गया ।

  • आँच न आने देना – (थोड़ी सी भी चोट न लगने देना) – मेरा दोस्त मुझ पर जरा भी आँच नहीं आने देगा ।

  • आटे दाल का भाव मालूम होना – (कठिन समय की समझ होना) – जब जिम्मेदारियाँ निभाने लगोगे तब तुम्हे आटे दाल का भाव पता लगेगा ।

  • आँसू पीकर रह जाना – (दुःख और अपमान को सहन करना) – सबके समने बुरा भला सुनकर भी वह आँसू पीकर रह गया ।

  • आग पर पानी डालना – ( शांत करना) – ओ भाइयों में ज्यादा गरमा-गर्मी हो गई थी लेकिन दीदी की बातों ने आग पर पानी डाल दिया ।

  • आग में कूदना – (जानबूझकर मुसीबत में पड़ना) – वीर पुरुष किसी खतरे से नहीं डरते वे तो आग में भी कूद पड़ते हैं ।

  • आसमान सिर पर उठाना – (शोर मचाना) – स्कूल के बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया ।

  • आँख भर आना – (आँसू आना) – बेटी की बिदाई से माँ बाप की आँख भर आई ।

  • आँखों में बसना – (दिल में समाना) – वह इतना बुद्धिमान है कि वह मेरी आँखों में बस गया ।

इ से बनने वाले मुहावरे 

  • इंद्र की परी - (बहुत सुन्दर स्त्री)- राधा तो इंद्र की परी हैं, वह तो विश्व सुन्दरी बनेगी।

  • इज्जत उतारना - (अपमानित करना)- जब चीनी लेकर पैसे नहीं दिए तो दुकानदार ने ग्राहक की इज्जत उतार दी।

  • इज्जत मिट्टी में मिलाना -(प्रतिष्ठा या सम्मान नष्ट करना) - रामू की शराब की आदत ने उसके परिवार की इज्जत मिट्टी में मिला दी हैं।

  • इधर-उधर की लगाना या इधर की उधर लगाना -(चुगली करना) - मित्र, इधर-उधर की लगाना छोड़ दो, बुरी बात हैं।

  • इधर-उधर की हाँकना -(बेकार की बातें करना या गप मारना)- वह हमेशा इधर-उधर की हाँकता रहता हैं, कभी बैठकर पढ़ता नहीं।

  • इस कान सुनना, उस कान निकालना -(ध्यान न देना)- उसकी बेकार की बातों को तो मैं इस कान सुनता हूँ, उस कान निकाल देता हूँ।

  • इस हाथ देना, उस हाथ लेना -(तुरन्त फल मिलना)- रामदीन तो इस हाथ दे, उस हाथ ले में विश्वास करता हैं।

  • इंद्र का अखाड़ा -(किसी सजी हुई सभा में खूब नाच-रंग होता है)- पहले जमाने में राजा-महाराजाओं के यहाँ इंद्र का अखाड़ा सजता था और आजकल दागी नेताओं के यहाँ।

  • इंतकाल होना -(मर जाना)- पिता के इंतकाल के बाद सारे घर की जिम्मेदारी अब फारुख के कंधों पर ही है।

  • इशारे पर नाचना -(वश में हो जाना)- जो व्यक्ति अपनी पत्नी के इशारे पर नाचता है वह अपने माँ-बाप की कहाँ सुनेगा।
  • (ई)

  • ईंट से ईंट बजाना -(युद्धात्मक विनाश लाना)- शुरू में तो हिटलर ने यूरोप में ईट-से-ईट बजा छोड़ी, मगर बाद में खुद उसकी ईंटे बजनी लगी।

  • ईंट का जबाब पत्थर से देना -(जबरदस्त बदला लेना)- भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा।

  • ईद का चाँद होना -(बहुत दिनों बाद दिखाई देना)- तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते, तुम्हे देखने को तरस गया, ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो।

  • ईमान बेचना - (बेईमानी करना)- मित्र, ईमान बेचने से कुछ नहीं होगा, परिश्रम करके खाओ।

उ से बनने वाले मुहावरे 

  • उड़ती चिड़िया को पहचानना - (मन की या रहस्य की बात तुरंत जानना)- कोई मुझे धोखा नही दे सकता। मै उड़ती चिड़िया पहचान लेता हुँ।

  • उन्नीस बीस का अंतर होना - (थोड़ा-सा अन्तर)- रामू और मोहन की सूरत में बस उन्नीस-बीस का अन्तर हैं।

  • उलटी गंगा बहाना - (अनहोनी या लीक से हटकर बात करना)- अमित हमेशा उल्टी गंगा बहाता हैं - कह रहा था कि वह हाथों के बल चलकर स्कूल जाएगा।

  • उँगली उठाना -(बदनाम करना या दोषारोपण करना)- किसी पर खाहमखाह उँगली उठाना गलत हैं।

  • उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ना -(थोड़ा-सा सहारा या मदद पाकर ज्यादा की कोशिश करना)- उस भिखारी को मैंने एक रुपया दे दिया तो वह पाँच रुपए और माँगने लगा। तब मैंने उससे कहा - अरे भाई, तुम तो उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ रहे हो।

  • उड़ जाना -(खर्च हो जाना)- vअरे मित्र, महीना पूरा होने से पहले ही सारा वेतन उड़ जाता हैं।

  • उड़ती खबर -(अफवाह)- मित्र, ये तो उड़ती खबर हैं। प्रधानमंत्री को कुछ नहीं हुआ।

  • उड़न-छू हो जाना -(गायब हो जाना)- जो भी हाथ लगा, चोर वही लेकर उड़न-छूहो गया।

  • उधेड़बुन में पड़ना या रहना -(फिक्र या चिन्ता करना)- राम को जब देखो, पैसों की उधेड़बुन में लगा रहता हैं।

  • उबल पड़ना -(एकाएक क्रोधित होना)- दादी माँ से सब बच्चे डरते हैं, पता नहीं वे कब उबल पड़ें।

  • उलटी माला फेरना -(बुराई या अनिष्ट चाहना)- जब आयुष को रमेश ने चाँटा मारा तो वह उल्टी माला फेरने लगा।


  • उलटी-सीधी जड़ना -(झूठी शिकायत करना)- उल्टी-सीधी जड़ना तो माया की आदत हैं।

  • उलटी-सीधी सुनाना -(डाँटना-फटकारना)- जब माला ने दादी का कहना नहीं माना तो वे उसे उल्टी-सीधी सुनाने लगीं।

  • उलटे छुरे से मूँड़ना -(ठगना)- प्रयाग में पण्डे और रिक्शा वाले गरीब ग्रामीणों को उल्टे छुरे से मूँड़ देते हैं।

  • उलटे पाँव लौटना -(बिना रुके, तुरंत वापस लौट जाना)- मनीष के घर पर ताला लगा था इसलिए मैं उलटे पाँव लौट आया।

  • उल्लू बनाना -(बेवकूफ बनाना)- कल एक साधु, ममता को उल्लू बनाकर उससे रुपए ले गया।

  • उल्लू सीधा करना -(अपना स्वार्थ सिद्ध करना)- मुझे ज्ञात हैं, तुम यहाँ अपना उल्लू सीधा करने आए हो।

  • उँगलियों पर नचाना -(वश में करना)- इब्राहीम की पत्नी तो उसे अपनी उँगलियों पर नचाती है।

  • उगल देना -(भेद प्रकट कर देना)- जब पुलिस के डंडे पड़े तो उस चोर ने सब कुछ सच-सच उगल दिया।

  • उठ जाना -(मर जाना)- जो भले लोग होते हैं उनके उठ जाने के बाद भी दुनिया उन्हें याद करती है।

  • उलटे मुँह गिरना -(दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में स्वयं नीचा देखना)- दूसरों को धोखा मत दो। किसी दिन सेर को सवा सेर मिल गया तो उलटे मुँह गिरोगे।

  • उल्लू बोलना -(वीरान स्थान होना)- जब पुलिस उस घर में घुसी तो वहाँ कोई नहीं था, उल्लू बोल रहे थे।

  • उल्लू का पट्ठा -(निपट मूर्ख)- उस उल्लू के पट्ठे को इतना समझाया कि दूसरों से पंगा न ले लेकिन उस समय उसने मेरी एक न सुनी। अब जब उलटे मुँह गिरा तो अक्ल आई।

ऊ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ना – (थोड़े की जगह पूरा लेने की इच्छा रखना) – मोहन से सावधान रहो वह तो ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ने वाला आदमी है ।

  • ऊँट के मुंह में जीरा – (आवश्यकता से कम वस्तु) – रत दिन मेहनत करने वाले मजदूर के लिए दो रोटियां ऊँट के मुंह में जीरे के समान हैं ।

  • ऊँगली पर नचाना – (अपने वश में कर लेना) – वह कमा कर देता है , इसलिए वह सारे घर को ऊँगली पर नचाता है ।

  • ऊँची दुकान फीका पकवान – (उपरी दिखावा करना) – वैसे तो दुकान इतनी बड़ी है और पकवान बिलकुल फीका यह तो वही बात हुई कि ऊँची दुकान फीका पकवान वाली बात हुई ।

ए से बनने वाले मुहावरे 

  • एक-एक ग्यारह होना – (एकता होना) – पहले वो अलग अलग रहते थे तो लोग उन्हें स्टेट थे लेकिन अब वो एक-एक ग्यारह हो गये हैं अब लोग उनसे डरने लगे हैं ।

  • एक टांग पर खड़ा होना- (काम के लिए तैयार रहना) – जब तक बहन की शादी नहीं हुई वह एक टांग पर खड़ा रहा ।

  • एक लाठी से हाँकना – (सबके साथ एक जैसा व्यवहार करना) – सब लोगों को एक लाठी से हाँकना कोई बुद्धिमानी नहीं है ।

  • एक हाथ से ताली न बजना – (दूसरे के बिना काम न होना) – कभी भी एक हाथ से ताली नहीं बजती गलती तुम दोनों की है ।

ऐ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऐसी तैसी करना – (बेईज्जती करना) – सब के समने उसने अपने ही बड़े भाई की ऐसी तैसी कर दी।

 उम्मीद करता हूं कि आप अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा समझ गए होंगे और यह लेख आपको अच्छा लगा होगा



View Details

 muhavare ka arth - मुहावरे का शाब्दिक अर्थ 'अभ्यास' है। जिस मुहावरे से किसी विशेष अर्थ का बोध होता है, उसे मुहावरा कहते हैं। 

मुहावरा एक पूर्ण वाक्य नहीं है इसलिए इसका स्वतंत्र रूप से उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध नहीं कराते हैं, लेकिन कुछ अनोखे अर्थ का आभास कराते हैं, मुहावरे कहलाते हैं। इन विशेष अर्थों को मुहावरे कहा जाता है।

muhavare ka arth bataiye | मुहावरे का अर्थ और वाक्य

हिंदी भाषा में मुहावरों (muhavara) का प्रयोग भाषा को सुंदर, प्रभावशाली ,संक्षिप्त तथा सरल बनाने के लिए किया जाता है। ये वाक्यांश होते हैं। इसका प्रयोग करते समय इसके शाब्दिक अर्थ के स्थान पर इसका विशेष अर्थ लिया जाता है। उनके विशेष अर्थ कभी नहीं बदलते। वे हमेशा एक जैसे रहते हैं।

muhavare meaning in hindi 

इनका प्रयोग वाक्यों में लिंग, शब्द, क्रिया के अनुसार किया जाता है। मुहावरा एक वाक्यांश है जो रचना में अपना विशेष अर्थ बताता है। मुहावरा एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है बात करना या उत्तर देना।


मुहावरे की विशेषताएं:-

  1. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के संदर्भ में अलग से नहीं किया जाता है।
  2. मुहावरा अपना मूल रूप कभी नहीं बदलता। इसका समानार्थी शब्दों में अनुवाद नहीं किया जा सकता है।
  3. मुहावरे का अर्थ नहीं लिया जाता है, केवल उसका विशेष अर्थ ग्रहण किया जाता है।
  4. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार तय किया जाता है।
  5. मुहावरे हिंदी भाषा की समृद्धि और सभ्यता के विकास का पैमाना हैं। इसकी अधिकता या कमी भाषा बोलने वालों के श्रम, भाषा निर्माण की शक्ति, अध्ययन, चिंतन, सभी को एक साथ दर्शाती है। समाज जितना व्यावहारिक और मेहनती होगा, भाषा में उनका उपयोग उतना ही अधिक होगा।
  6. देश और समाज की तरह मुहावरे भी बद से बदतर होते जा रहे हैं। नए समाज के साथ नए मुहावरे आते हैं।
  7. हिंदी भाषा के अधिकांश मुहावरे हमारे शरीर के अंगों से भी जुड़े हुए हैं। वही अन्य भाषाओं के मुहावरों के लिए जाता है।

क्या आप जानते हैं कि मुहावरे और लोकोक्तियों में क्या अंतर होता है चलिए जान लेते हैं

मुहावरे और लोकोक्तियों में अंतर :-

मुहावरा एक वाक्यांश होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता जबकि लोकोक्तियाँ अपने आप में पूर्ण होती हैं। लोकोक्तियों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है।

 उम्मीद करता हूं कि आप मुहावरे का अर्थ तथा उसके विशेषता समझ गए होंगे साथी मुहावरे और लोकोक्तियां में अंतर भी समझ गए होंगे

View Details

 पिछले अध्याय में हमने स्वर के वर्ण क्रमानुसार पर्यायवाची शब्द पढ़े और आज हम इस लेख में क से झ तक पर्यायवाची मतलब की क से झ तक वर्शुण से शुरू होने वाले शब्द के पर्यायवाची शब्द पढ़ेंगे

क से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • कमल- नलिन, अरविन्द, उत्पल, अम्भोज, तामरस, पुष्कर, महोत्पल, वनज, कंज, सरसिज, राजीव, पद्म, पंकज, नीरज, सरोज, जलज, जलजात, शतदल, पुण्डरीक, इन्दीवर।
  • किरण- गभस्ति, रश्मि, मयूख, मरीचि, ज्योति, अंशु, अर्चि, गो, कर, प्रभा।
  • कामदेव- मदन, मनोज,पंचशर, मनसिज, काम, अनंग, आत्मभू, कंदर्प, दर्पक, रतिपति, पुष्पधन्वा, मन्मथ।
  • कपड़ा- मयुख, वस्त्र,  अंशु, कर, अम्बर, चीर, वसन, पट,परिधान।
  • कुबेर- कित्ररेश, यक्षराज, धनद, धनाधिप, राजराज।
  • किस्मत- होनी, विधि, नियति, भाग्य।
  • कच- बाल, केश,  रोम, शिरोरूह, कुन्तल, चिकुर, अलक,।
  • कबूतर- कपोत, रक्तलोचन, पारावत, कलरव, हारिल।
  • कण्ठ- ग्रीवा, गर्दन, गला, शिरोधरा।
  • कृपा- प्रसाद, करुणा, अनुकम्पा, दया, अनुग्रह।
  • किताब- पोथी, ग्रन्थ, पुस्तक।
  • किनारा- तीर, कूल, कगार, तट।
  • किसान- कृषक, भूमिपुत्र, हलधर, खेतिहर, अन्नदाता।
  • कृष्ण- राधापति, घनश्याम, गोविन्द, मुरारी, नन्दनन्दन, राधारमण, वासुदेव, माधव, मोहन, केशव, दामोदर, ब्रजवल्लभ, गोपीनाथ,  कंसारि, रणछोड़, बंशीधर, मुरलीधर, द्वारिकाधीश, यदुनन्दन, गिरधारी।
  • कान- कर्ण, श्रुति, श्रुतिपटल, श्रवण, श्रोत, श्रुतिपुट।
  • कोयल- कोकिला, पिक, काकपाली, बसंतदूत, सारिका, कुहुकिनी, वनप्रिया।
  • क्रोध- रोष, कोप, अमर्ष, गुस्सा, आक्रोश, कोह, प्रतिघात।
  • कार्तिकेय- कुमार, षडानन, शरभव, स्कन्द।
  • कुत्ता- श्वा, श्रवान, कुक्कुर।
  • शुनक, सरमेव।
  • कल्पद्रुम- देवद्रुम, कल्पवृक्ष, पारिजात, मन्दार, हरिचन्दन।
  • काक- कौआ, वायस, काग, करठ, पिशुन।
  • कंगाल- निर्धन, गरीब, रंक, धनहीन।
  • कंचन- स्वर्ण, सोना, कनक, कुंदन, हिरण्य।
  • कंजूस- कृपण, सूम, मक्खीचूस।
  • कंटक- काँटा, खार, सूल।
  • कंदरा- गुफा, खोह, विवर, गुहा।
  • कछुआ- कच्छप, कमठ, कूर्म।
  • कटक- फौज, सेना, पलटन, लश्कर, चतुरंगिणी।
  • कद्र- मान, सम्मान, इज्जत, प्रतिष्ठा।
  • कमजोर- निर्बल, बलहीन, दुर्बल, मरियल, शक्तिहीन।
  • कमला- लक्ष्मी, महालक्ष्मी, श्री, हरप्रिया।
  • कर्ज- उधार, ऋण, कर्जा, उधारी, कुसीद।
  • कलानाथ- चंद्रमा, कलाधर, सुधांशु, हिमांशु, सुधाकर, सोम, तारापति।
  • कल्याण- भलाई, परहित, उपकार, भला।
  • कष्ट- तकलीफ, पीड़ा, वेदना, दुःख।
  • काग- कौआ, कागा, काक, वायस।
  • कातिल- खूनी, हत्यारा, घातक।
  • कामधेनु- सुरभि, सुरसुरभि, सुरधेनु।
  • कायर- कापुरुष, डरपोक, बुजदिल।
  • काल- समय, वक्त, वेला।
  • कालकूट- जहर, विष, गरल, हलाहल।
  • काला- श्याम, कृष्ण, कलूटा, साँवला, स्याह।
  • किनारा- तट, तीर, कगार, कूल, साहिल।
  • किरण- किरन, अंशु, रश्मि, मयूख।
  • किरीट- ताज, मुकुट, शिरोभूषण।
  • किश्ती- कश्ती, नाव, नौका, नैया।
  • कीर- तोता, सुग्गा, सुआ, शुक।
  • कुंभ- घड़ा, गागर, घट, कलश।
  • कुसुम- पुष्प, फूल, प्रसून, पुहुप।
  • कृश- दुबला, क्षीणकाय, कमजोर, दुर्बल, कृशकाय
  • कृषि- किसानी, खेतीबाड़ी, काश्तकारी।
  • केतन- ध्वज, झंडा, पताका, परचम।
  • केवट- मल्लाह, माँझी, खेवैया, नाविक।
  • केसरी- शेर, सिंह, नाहर, वनराज, मृगराज, मृगेंद्र।
  • कोकिल- कोकिला, कोयल, पिक, श्यामा।
  • कोविद- विद्वान, पंडित, विशारद।
  • कुद्ध- नाराज, कुपित, क्रोधित, क्रोधी।
  • क्रूर- बेरहम, बेदर्द, बेदर्दी, बर्बर।


ख से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • खाना- भोज्य सामग्री, खाद्यय वस्तु, आहार, भोजन।
  • खग- पक्षी, द्विज, अण्डज, शकुनि, विहग, नभचर, पखेरू।
  • खंभा- स्तूप, स्तम्भ, खंभ।
  • खंड- अंश, भाग, हिस्सा, टुकड़ा।
  • खटमल- मत्कुण, खटकीट, खटकीड़ा।
  • खद्योत- जुगनू, सोनकिरवा, पटबिजना, भगजोगिनी।
  • खर- गधा, गर्दभ, खोता, रासभ, वैशाखनंदन।
  • खरगोश- शशक, शशा, खरहा।
  • खल- दुष्ट, बदमाश, दुर्जन, गुंडा।
  • खलक- दुनिया, जगत, जग, विश्व, जहान।
  • खादिम- नौकर, चाकर, भृत्य, अनुचर।
  • खाविंद- पति, मियाँ, भर्तार, बालम, साजन, सैयाँ।
  • खिल्ली- मखौल, ठिठोली, उपहास।
  • खुदगर्ज- स्वार्थी, मतलबी, स्वार्थपरायण।
  • खुदा- राम, रहीम, रहमान, अल्लाह, परवरदिगार।
  • खौफ- डर, भय, दहशत, भीति।
  • खून- रक्त, लहू, शोणित, रुधिर।


ग से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • गणेश- विनायक, गजानन,  विघ्रनाशक, भवानीनन्दन, विघ्रराज, गौरीनंदन, मूषकवाहन, गजवदन, मोदकप्रिय, मोददाता, गणपति, लम्बोदर, महाकाय, गणनायक, शंकरसुवन, एकदन्त।
  • गंगा- देवनदी, मंदाकिनी, भगीरथी, विश्नुपगा, देवपगा, ध्रुवनंदा, सुरसरिता, देवनदी, जाह्नवी, सुरसरि, अमरतरंगिनी, विष्णुपदी, नदीश्वरी, त्रिपथगा।
  • गज- हाथी, हस्ती, मतंग, कूम्भा, मदकल ।
  • गाय- गौ, धेनु, सुरभि, भद्रा, दोग्धी, रोहिणी।
  • गृह- घर, सदन, निकेतन, निवास, गेह, भवन, धाम, आगार, आवास, निलय, आयतन, आलय, मंदिर।
  • गर्मी- ताप, ग्रीष्म, ऊष्मा, गरमी, निदाघ।
  • गुरु- शिक्षक, आचार्य, उपाध्याय।
  • गंगा- भगीरथी, मंदाकिनी,सुरसरिता, देवनदी, जाहनवी।
  • गरुड़- खगेश, पत्रगारि, वातनेय, खगपति, उरगारि, हरियान, सुपर्ण, विषमुख।
  • गँवार- अशिष्ट, असभ्य, उजड्ड।
  • गऊ- गैया, गाय, धेनु।
  • गगन- आसमान, आकाश, नभ, व्योम, अंतरिक्ष।
  • गज- हाथी, गय, गयंद, गजेंद्र, मतंग, मराल, फील।
  • गन्ना- ईख, इक्षु, उक्षु, ऊख।
  • गरदन- गला, कंठ, ग्रीवा, गलई।
  • गल्ला- अन्न, अनाज, फसल, खाद्यान्न।
  • गाँव- ग्राम, देहात, खेड़ा, पुरवा, टोला।
  • गाथा- कथा, कहानी, किस्सा, दास्तान।
  • गाना- गान, गीत, नगमा, तराना।
  • गाफिल- बेखबर, बेपरवाह, असावधान।
  • गिरि- पहाड़, मेरु, शैल, महीधर, धराधर, भूधर।
  • गिरिराज- हिमालय, पर्वतराज, पर्वतेश्वर, शैलेंद्र, गिरीश, गिरींद्र।
  • गीदड़- श्रृंगाल, सियार, जंबुक।
  • गुनाह- अपराध, कसूर, खता, दोष।
  • गुलामी- दासता, परतंत्रता, परवशता।
  • गेहूँ- कनक, गोधूम, गंदुम।
  • गोद- अंक, क्रोड़, गोदी।
  • गोधूलि- साँझ, संध्या, शाम, सायंकाल।
  • ग्रामीण- ग्राम्य, ग्रामवासी, देहाती।
  • ग्राह- मगरमच्छ, घड़ियाल, मगर, झषराज।
  • गदहा- खर, गर्दभ,  बेशर, चक्रीवान, धूसर, रासभ, वैशाखनन्दन।


घ से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • घट- घड़ा, कलश, कुम्भ, निप।
  • घर- आलय, आवास, गेह, गृह, निकेतन, निलय, निवास, भवन, वास।
  • घृत- घी, अमृत, नवनीत।
  • घटना- हादसा, वारदात, वाक्या।
  • घन- मेघ, बादल, घटा, अंबुद, अंबुधर।
  • घपला- गड़बड़ी, गोलमाल, घोटाला।
  • घमंड- दंभ, दर्प, गुमान, अभिमान, गर्व, गरूर, अहंकार।
  • घुड़सवार- अश्वारोही, तुरंगी, तुरंगारूढ़।
  • घुमक्कड़- भ्रमणशील, पर्यटक, यायावर।
  • घूँस- घूस, रिश्वत, उत्कोच।
  • घोड़ा- तुरंग, हय, घोट, घोटक, अश्व।
  • घास- तृण, दूर्वा, दूब, कुश, शाद।


च से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • चन्द्र- चाँद, सुधांशु, सुधाधर, राकेश, सारंग, निशाकर, निशापति, रजनीपति, मृगांक, कलानिधि, हिमांशु, इंदु, सुधाकर, विधु, शशि, चंद्रमा, तारापति।
  • चरण- पद, पग, पाँव, पैर, पाद।
  • चतुर- विज्ञ, निपुण, कुशल, दक्ष,  नागर, पटु, प्रवीण, योग्य।
  • चोर- तस्कर, दस्यु, रजनीचर, मोषक, कुम्भिल, खनक, साहसिक।
  • चाँदनी- चन्द्रिका, कौमुदी, ज्योत्स्ना, चन्द्रमरीचि, उजियारी, चन्द्रप्रभा, जुन्हाई।
  • चाँदी- रजत, सौध, रूपा, रूपक, रौप्य, चन्द्रहास।
  • चन्द्रिका- चाँदनी, ज्योत्स्ना, कौमुदी।
  • चंट- चालाक, घाघ, काइयाँ।
  • चंडी- दुर्गा, अंबा, काली, कालिका, जगदंबिका, भगवती।
  • चंदन- गंधराज, गंधसार, मलयज।
  • चंद्रशेखर- महादेव, शिव, शंभु, शंकर, महेश्वर, नीलकंठ, आशुतोष।
  • चक्षु- नैन, आँख, दीदा, लोचन, नेत्र, नयन।
  • चतुरानन- विधाता, ब्रह्मा, सृष्टा, सृष्टिकर्ता।
  • चना- चणक, रहिला, छोला।
  • चर्मकार- मोची, चमार, पादुकाकार।
  • चारबाग- बाग, बगीचा, उपवन, उद्यान।
  • चारु- कमनीय, मनोहर, आकर्षक, खूबसूरत।
  • चावल- तंदुल, धान, भात।
  • चिट्ठी- पत्र, पाती, खत।
  • चिराग- दीया, दीपक, दीप, शमा।
  • चूहा- मूसा, मूषक, मुसटा, उंदुर।
  • चेरी- दासी, सेविका, बाँदी, नौकरानी, अनुचरी।
  • चेला- शागिर्द, शिष्य, विद्यार्थी।
  • चेहरा- शक्ल, आनन, मुख, मुखड़ा।
  • चोरी- स्तेय, चौर्य, मोष, प्रमोष।
  • चौकन्ना- सचेत, सजग, सावधान, जागरूक, चौकस।
  • चौकीदार- प्रहरी, पहरेदार, रखवाला।
  • चौमासा- वर्षाकाल, वर्षाऋतु, बरसात।
  • चोटी- मूर्धा, शीश, सानु, शृंग।


छ से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • छतरी- छत्र, छाता, छत्ता।
  • छली- छलिया, कपटी, धोखेबाज।
  • छवि- शोभा, सौंदर्य, कान्ति, प्रभा।
  • छानबीन- जाँच, पूछताछ, खोज, अन्वेषण, शोध, गवेषण।
  • छैला- सजीला, बाँका, शौकीन।
  • छँटनी- कटौती, छँटाई, काट-छाँट।
  • छटा- शोभा, छवि, सुंदरता, खूबसूरती।
  • छल- दगा, ठगी, फरेब, छलावा।
  • छाछ- मही, मठा, मठ्ठा, लस्सी, छाछी।
  • छाती- सीना, वक्ष, उर, वक्षस्थल।
  • छींटाकशी- ताना, व्यंग्य, फब्ती, कटाक्ष।
  • छुटकारा- मुक्ति, रिहाई, निजात।
  • छेरी- बकरी, छागी, अजा।
  • छोर- नोक, कोर, किनारा, सिरा।


ज से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • जल- मेघपुष्प, अमृत, सलिल, वारि, नीर, तोय, अम्बु, उदक, पानी, जीवन, पय, पेय।
  • जहर- गरल, कालकूट, माहुर, विष ।
  • जगत- संसार, विश्व,  भव, दुनिया, जग, जगती, लोक, भुवन।
  • जीभ- रसना, रसज्ञा, वाणी, वाचा, जिह्वा, रसिका,  जबान।
  • जंगल- विपिन, कानन, गहन, कांतार, वन, अरण्य, बीहड़, विटप।
  • जेवर- गहना, अलंकार, भूषण, आभरण, मंडल।
  • ज्योति- आभा, छवि, प्रभा, भा, द्युति, दीप्ति, रुचि, रोचि।
  • जहाज- पोत, जलयान।
  • जानकी- सीता, वैदही, जनकसुता, मिथिलेशकुमारी, जनकतनया, जनकात्मजा।
  • जंग- लड़ाई, संग्राम, समर, युद्ध।
  • जईफी- वृद्धावस्था, बुढ़ापा, बुजुर्गी।
  • जत्था- गुट, दल, समूह, टोली, गिरोह।
  • जनक- तात, बाप, पिता, बप्पा, बापू, वालिद।
  • जननी- माँ, माता, मम्मी, अम्मा, वालिदा।
  • जन्नत- स्वर्ग, सुरधाम, बैकुंठ, सुरलोक, हरिधाम।
  • जन्मांध- सूरदास, अंधा, आँधरा, नेत्रहीन।
  • जबह- वध, हत्या, कत्ल, खून।
  • जम्हूरियत- प्रजातंत्र, लोकतंत्र, लोकशाही, जनताशासन।
  • जमाई- दामाद, जामाता, जँवाई।
  • जमीन- धरती, भू, भूमि, पृथ्वी, धरा, वसुंधरा।
  • जय- जीत, फतह, विजय।
  • जरठ- वृद्ध, बुड्ढा, बूढ़ा।
  • जलाशय- तालाब, तलैया, ताल, पोखर, सरोवर।
  • जवान- तरुण, युवक, नौजवान, नौजवाँ, युवा।
  • जवानी- युवावस्था, यौवन, तारुण्य, तरुणाई।
  • जहन्नुम- नरक, दोजख, यमपुरी, यमलोक।
  • जहाज- पोत, बेड़ा, जलयान, जलपोत।
  • जहीन- बुद्धिमानी, अक्लमंद, मेधावी, मेधावान, तीक्ष्ण बुद्धि।
  • जाँघ- उरु, जानु, जघन, जंघा, रान।
  • जाई- बेटी, कन्या, पुत्री, लड़की।
  • जासूस- गुप्तचर, भेदिया, खुफिया।
  • जिंदगी- जिंदगानी, जीवन, हयात।
  • जिल्लत- अपमान, तिरस्कार, अनादर, तौहीन, बेइज्जती।
  • जिस्म- देह, बदन, शरीर, काया, वपु।
  • जीव- रूह, प्राण, आत्मा, जीवात्मा।
  • जीविका- रोजी-रोटी, रोजी, आजीविका, वृत्ति।
  • जुल- धोखा, फरेब, दगा, छल।
  • जुलाहा- बुनकर, कोली, कोरी।
  • जोहड़- तालाब, तलैया, तड़ाग, सरोवर, जलाशय।
  • ज्ञानी- विद्वान, सुविज्ञ, आलिम, विवेकी, ज्ञानवान।
  • ज्योत्स्ना- चाँदनी, चंद्रप्रभा, कौमुदी, जुन्हाई।


झ से शुरू होने वाले शबो के पर्यायवाची शब्द

  • झरना- उत्स, स्रोत, प्रपात, निर्झर, प्रस्त्रवण।
  • झण्डा- ध्वजा, पताका, केतु।
  • झंझा- अंधड़, आँधी, बवंडर, झंझावत, तूफान।
  • झाँसा- दगा, धोखा, फरेब, ठगी।
  • झींगुर- घुरघुरा, झिल्ली, जंजीरा, झिल्लिका।
  • झूठ- असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत।

View Details

हेलो दोस्तो! पिछले अध्याय में हम पर्यायवाची शब्द के बारे में जान गए हैं। आज इस लेख में हम अधिक से अधिक अ से औ तक वर्ण का क्रमानुसार पर्यायवाची शब्द पढेंगे।


वर्ण क्रमानुसार पर्यायवाची शब्द 

आइए स्वरों जैसे अ, आ, इ, ई .... औ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द पढ़ते है।

अ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • अंधकार – तम, तमस, अंधियारा, तिमिर, अँधेरा।
  • अपमान – अनादर, अवज्ञा, अवहेलना, तिरस्कार।
  • अलंकार – आभूषण, गहना, जेवर।
  • अहंकार – दंभ, अभिमान, दर्प, मद, घमंड।
  • अमृत – सुधा, अमिय, पीयूष, सोम।
  • असुर – दैत्य, दानव, राक्षस, निशाचर, रजनीचर, दनुज, रात्रिचर, तमचर।
  • अतिथि – मेहमान, अभ्यागत, आगन्तुक।
  • अनुपम – अपूर्व, अतुल्य, अनोखा, अद्भुत, अनन्य।
  • अर्थ – धन, द्रव्य, मुद्रा, दौलत, वित्त, पैसा।
  • अश्व – हय, तुरंग, घोड़ा, घोटक, बाजि, सैन्धव।
  • अंतर- भिन्नता, असमानता, भेद, फर्क।
  • अंतर्धान- गायब, लुप्त, ओझल, अदृश्य।
  • अंदर- भीतर, आंतरिक, अंदरूनी, अभ्यंतर।
  • अंदाज- अंदाजा, अटकल, कयास, अनुमान।


आ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • आत्मा – जीव, चैतन्य, चेतनतत्तव, अंतःकरण।
  • आग – अनल, हुतासन, पावक, कृशानु, वहनि, शिखी, वह्नि।
  • आकाश – नभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अर्श।
  • आनंद – हर्ष, सुख, आमोद, मोद, प्रमोद, उल्लास।
  • आम – रसाल, आम्र, सौरभ, अमृतफल।
  • आश्रम – कुटी, विहार, मठ, संघ, अखाड़ा।


इ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • इच्छा – अभिलाषा, चाह, कामना, लालसा, मनोरथ, आकांक्षा, अभीष्ट।
  • इन्द्र – सुरेश, सुरेन्द्र, देवेन्द्र, सुरपति, शक्र, पुरंदर, देवराज, महेन्द्र, शचीपति।
  • इन्द्राणि – इन्द्रवधू, मधवानी, शची, शतावरी, पोलोमी।
  • इंसान- मनुष्य, आदमी, मानव, मानुष।
  • इंसाफ- न्याय, फैसला, अद्ल।
  • इजाजत- स्वीकृति, मंजूरी, अनुमति।
  • इज्जत- मान, प्रतिष्ठा, आदर, आबरू।
  • इनाम- पुरस्कार, पारितोषिक, बख्शीश।
  • इलजाम- आरोप, लांछन, दोषारोपण, अभियोग।


ई से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • ईश्वर- परमपिता, परमात्मा, प्रभु, ईश, जगदीश, भगवान, परमेश्वर, जगदीश्वर, विधाता।
  • ईख- गन्ना, ऊख, इक्षु।
  • ईप्सा- इच्छा, ख्वाहिश, कामना, अभिलाषा।
  • ईमानदारी- सच्चा, सत्यपरायण, नेकनीयत, सत्यनिष्ठ।
  • ईर्ष्या- विद्वेष, जलन, कुढ़न, ढाह।
  • ईसा- यीशु, ईसामसीह, मसीहा।
  • ईहा- मनोकामना, अभिलाषा, इच्छा, आकांक्षा, कामना।


उ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • उपवन- बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन।
  • उक्ति- कथन, वचन, सूक्ति।
  • उग्र- प्रचण्ड, उत्कट, तेज, महादेव, तीव्र, विकट।
  • उचित- ठीक, मुनासिब, वाज़िब, समुचित, युक्तिसंगत, न्यायसंगत, तर्कसंगत, योग्य।
  • उच्छृंखल- उद्दंड, अक्खड़, आवारा, अंडबंड, निरकुंश, मनमर्जी, स्वेच्छाचारी।
  • उजड्ड- अशिष्ट, असभ्य, गँवार, जंगली, देहाती, उद्दंड, निरकुंश।
  • उजला- उज्ज्वल, श्वेत, सफ़ेद, धवल।
  • उजाड- जंगल, बियावान, वन।
  • उजाला- प्रकाश, रोशनी, चाँदनी।
  • उत्कष- समृद्धि, उन्नति, प्रगति, प्रशंसा, बढ़ती, उठान।
  • उत्कृष्ट- उत्तम, उन्नत, श्रेष्ठ, अच्छा, बढ़िया, उम्दा।
  • उत्कोच- घूस, रिश्वत।
  • उत्पति- उद्गम, पैदाइश, जन्म, उद्भव, सृष्टि, आविर्भाव, उदय।
  • उद्धार- मुक्ति, छुटकारा, निस्तार, रिहाई।
  • उपाय- युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न।
  • उज्र- ऐतराज, विरोध, आपत्ति।
  • उत्थान- उत्कर्ष, प्रगति, उन्नयन।
  • उत्साह- उमंग, जोश, उछाह।
  • उदार- फ़राख़दिल, क्षीरनिधि, दरियादिल, दानशील, दानी।
  • उदाहरण- मिसाल, नजीर, दृष्टांत।
  • उद्दंड- ढीठ, अशिष्ट, बेअदब, गुस्ताख़।
  • उद्देश्य- लक्ष्य, प्रयोजन, मकसद।
  • उद्यान- बगीचा, बाग, वाटिका, उपवन।
  • उन्नति- प्रगति, तरक्की, विकास, उत्कर्ष।
  • उपकार- भेंट, नजराना, तोहफा।
  • उपहास- परिहास, मजाक, खिल्ली।
  • उपानह- खड़ाऊँ, पनही, पादुका, पदत्राण।
  • उमा- गौरी, गौरा, गिरिजा, पार्वती, शिवा, शैलजा, अपर्णा।
  • उम्मीद- आशा, आस, भरोसा।
  • उर- हृदय, दिल, वक्षस्थल।
  • उरग- सर्प, साँप, नाग, फणी, फणधर, मणिधर, भुजंग।
  • उलूक- उल्लू, चुगद, खूसट, कौशिक, घुग्घू।
  • उषा- सुबह, भोर, भिनसार, अलस्सुबह, ब्रह्ममुहूर्त।
  • उष्णीष- मुंड़ासा, पगड़ी, साफा, पाग, मुरेठा।


ऊ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • ऊँचा- तुंग, उच्च, बुलंद, गगनस्पर्शी।
  • ऊँट- करभ, उष्ट्र, लंबोष्ठ, साँड़िया।
  • ऊखल- ओखली, उलूखल, कूँडी।
  • ऊसर- अनुपजाऊ, बंजर, अनुर्वर, वंध्य।
  • ऊधम- उपद्रव, उत्पात, धूम, हुल्लड़, हुड़दंग, धमाचौकड़ी।


ऋ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • ऋक्ष- भालू, रीछ, भीलूक, भल्लाट, भल्लूक।
  • ऋक्षेश- चंद्रमा, चंदा, चाँद, शशि, राकेश, कलाधर, निशानाथ।
  • ऋण- कर्ज, कर्जा, उधार, उधारी।
  • ऋतुराज- बहार, मधुमास, वसंत, ऋतुपति, मधुऋतु।
  • ऋषभ- वृष, वृषभ, बैल, पुंगव, बलीवर्द, गोनाथ।
  • ऋषि- साधु, महात्मा, मुनि, योगी, तपस्वी।
  • ऋष्यकेतु- कामदेव, मकरकेतु, मकरध्वज, मदन, मनोज, मन्मथ।


ए से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • एकतंत्र- राजतंत्र, एकछत्र, तानाशाही, अधिनायकतंत्र।
  • एकदंत- गणेश, गजानन, विनायक, लंबोदर, विघ्नेश, वक्रतुंड।
  • एतबार- विश्वास, यकीन, भरोसा।
  • एषणा- इच्छा, आकांक्षा, कामना, अभिलाषा, हसरत।
  • एहसान- कृपा, अनुग्रह, उपकार।


ऐ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • ऐंठ- कड़, दंभ, हेकड़ी, ठसक।
  • ऐब- खामी, खराबी, कमी, अवगुण।
  • ऐयार- धूर्त, मक्कार, चालाक।
  • ऐहिक- सांसारिक, लौकिक, दुनियावी।
  • ऐक्य- एकत्व, एका, एकता, मेल।
  • ऐश्वर्य- समृद्धि, विभूति।


ओ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • ओज- तेज, शक्ति, बल, चमक, कांति, दीप्ति, वीर्य।
  • ओंठ- ओष्ठ, अधर, लब, होठ।
  • ओला- हिमगुलिका, उपल, करका, हिमोपल।
  • ओस- नीहार, तुहिन, शबनम।
  • ओहार- आवरण, परदा, आच्छादन।


औ से शुरू होने वाले शब्दों के पर्यायवाची शब्द

  • औचक- अचानक, यकायक, सहसा।
  • औरत- स्त्री, जोरू, घरनी, महिला, मानवी, तिरिया, नारी, वनिता, घरवाली।
  • औचित्य- उपयुक्तता, तर्कसंगति, तर्कसंगतता।
  • औलाद- संतान, संतति, आसऔलाद, बाल-बच्चे।
  • औषधालय- चिकित्सालय, दवाखाना, अस्पताल।
उम्मीद करता हूँ की आपको यह लेख वर्णक्रमानुसार पर्यायवाची शब्द अच्छा लगा होगा। यदि किसी प्रकार की समस्या है तो कमेंट करके हमे बताये।

View Details

Paryayvachi shabd ki paribhasha: हेलो दोस्तो! आज हम इस लेख में पर्यायवाची शब्द के बारे में पढेंगे। जैसे कि पर्यायवाची शब्द क्या है, परिभाषा, और प्रकार के बारे में विस्तृत पढेंगे।


पर्यायवाची शब्द क्या है | Paryayavachi Shabd kya hai

किसी शब्द-विशेष के लिए प्रयुक्त समानार्थक शब्दों को पर्यायवाची शब्द कहते हैं। यद्यपि पर्यायवाची शब्द समानार्थी होते हैं किन्तु भाव में ये एक-दूसरे से किंचित भिन्न होते हैं।


अर्थात जिन शब्दों के अर्थ में समानता होती है, उन्हें समानार्थक, या पर्यायवाची शब्द कहते हैं।

जैसे :-

पावक का पर्यायवाची- कृशानु, हुताशन, वैश्वानर, शुचि, ज्वाला, आग, अनल।

मुँह का पर्यायवाची- चेहरा, मुखड़ा, आनन, मुख।


पर्यायवाची कितने प्रकार की होती है

पर्यायवाची को तीन भागों में बांटा जा सकता है।

1. पूर्ण पर्याय

2. पूर्णा पूर्ण पर्याय

3. अपूर्ण पर्याय


1. पूर्ण पर्याय पर्यायवाची शब्द :-

वाक्य में यदि एक शब्द के स्थान पर दूसरा शब्द रखा जा सके और अर्थ में कोई अंतर नहीं पड़ता हो, तो यह उसका पूर्ण पर्याय है। जैसे- जलज,वारिज।


2. पूर्णा पूर्ण पर्याय पर्यायवाची शब्द :-

जो एक प्रसंग में तो पूर्ण पर्याय हो, किंतु दूसरे प्रसंग में समानार्थक ना रह पाए, जैसे- कपड़े टांगना के स्थान पर कपड़े लटकाना कह दे तो वही अर्थ प्राप्त होता है, परंतु वह मुंह लटकाए बैठा है किस स्थान पर वह मुंह टांगे बैठा है नहीं कर सकते।


3. अपूर्ण पर्याय पर्यायवाची शब्द :-

समानार्थक शब्दों में अर्थ भेद।

View Details

आज इस लेख में हम छंद के बारे में पढेंगे जैसे- छंद की परिभाषा, अंग तथा भेद इत्यादि। चलिये सबसे पहले छंद का मतलब जान लेते हैं।

छंद क्या है | Chhand kya hai

छंद शब्द संस्कृत के छिदि धातु से बना है छिदि का अर्थ है ढकना, आच्छादित करना। सर्वप्रथम छंद की चर्चा ऋग्वेद में आई है। छंद वह सुंदर आवरण है जो कविता-कामिनी के शरीर को ढक कर उसके सौंदर्य में वृद्धि करता है।

छंद की परिभाषा, अंग तथा भेद


छंद की परिभाषा 

जिन रचनाओं में वर्ण, मात्रा, यति, गति, तुक आदि पर बल दिया जाता है वे छंद कहलाते हैं।

अक्षरों की संख्या एवं क्रम मात्रा, गणना तथा यति- गति से संबंधित विशिश्ट नियमों से नियोजित पद रचना छंद कहलाती है। आइये अब यह जान लेते हैं कि छंद के कितने अंग होते हैं।


छंद के अंग | Chhand ke ang

छंद के सात अंग होते हैं जो निम्नलिखित है।

  1. वर्ण
  2. मात्रा
  3. यति
  4. गति
  5. तुक
  6. लघु और गुरु
  7. गण

1. वर्ण क्या है

वर्ण ही अक्षर कहलाते हैं। यह एक छोटी सी आवाज है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता।

वर्ण के दो भेद होते है।

(I)- लघु/ह्रस्व स्वर- जिसका उच्चारण करने में कम समय (एक मात्रा का समय) लगता है, उसे लघु/ह्रस्व स्वर कहा जाता है

जैसे :- अ, इ, उ,ऋ।


(II)- दीर्घ स्वर- जिन के उच्चारण में लघु स्वर से अधिक समय (दो मात्रा का समय) लगता है उसे दीर्घ स्वर कहते हैं।

जैसे :- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ।


2. मात्रा क्या है

किसी स्वर के उच्चारण में जितना समय लगता है, उसे मात्रा कहते हैं।


3. यति क्या है

श्लोकों को पढ़ते समय अनेक स्थानों पर विराम लेना पड़ता है, वही विराम स्थलों को यति कहा गया है।


4. गति क्या है

 छंदों को पढ़ते समय प्रवाह की अनुभूति होती है जिसे गति कहा जाता है।


5. तुक क्या है

छंदों को पदान्त में जो अक्षरों की समानता पाई जाती हैं, उन्हें "तुक" कहते हैं। तुक दो प्रकार के होते हैं।

i. तुकांत

ii.अतुकांत।


6.लघु और गुरु क्या होता है

छंद शास्त्र में ह्रस्व को लघु और दीर्घ को गुरु कहते हैं।


7. गण क्या है

गुरु के क्रम को बनाए रखने के लिए गणों का उपयोग किया जाता है। तीन वर्णों के समूह को गण कहते हैं। गणों की संख्या 8 है जो हैं- यगण, मगण, तगण, रगण, जगण, भगण, नगण, सगण। 


छंद के भेद | छंद के कितने भेद होते हैं

वर्ण और मात्रा के विचार से छंद के चार भेद हैं जो निम्नलिखित है।

(I) मात्रिक छंद

(ii) वर्णिक छंद

(iii) उभय छंद

(iv) मुक्तक छंद


(I) मात्रिक छंद किसे कहते हैं

मात्राओं की गणना के आधार पर जिस पद्य की व्यवस्था की जाती है, उसे एकात्मक पद (मात्रिक छंद) कहते हैं।

इन श्लोकों में मात्राओं की समानता के नियम का पूरा ध्यान रखा जाता है, लेकिन अक्षरों की समानता का ध्यान नहीं रखा गया है। ऐसे श्लोक मात्र श्लोक कहलाते हैं।


(ii) वर्णिक छंद किसे कहते हैं

वर्ण गणना के आधार पर रचित श्लोक वर्णिक छन्द कहलाता है। इन शब्दों में वर्णों की संख्या और नियम का ध्यान रखा जाता है।

छंद और वर्णानुक्रम में तीन अंतर हैं।

मात्रिक और वर्णिक छंदों के तीन- तीन भेद हैं

1. सम

2. अर्द्ध सम

3. विषम


1. सम - जिस पद में चारों चरणों में मात्राओं अक्षरों की संख्या समान हो, वह साम कहलाता है।

जैसे :- चौपाई।


2. अर्द्ध सम - जिस छंद के प्रथम और द्वितीय तथा तृतीय और चतुर्थ चरणों में मात्राओं अथवा वर्णों की संख्या बराबर होती है, उसे अर्द्ध सम कहते हैं।

जैसे :- दोहा, सोरठा, वरवै आदि।


3. विषम- जिस छंद में 4 से अधिक 6 चरण हों तथा प्रत्येक चरण में मात्राएं अथवा वर्णों की संख्या भिन्न भिन्न हो उसे विषम कहते हैं।

जैसे :- छप्पय, कुंडलिया आदि।


(iii) उभय छंद क्या है

गणों में वर्णों का बधा होना मुख्य विशेषता होने के कारण इसे उभय श्लोक कहा जाता है। इन श्लोकों (छंदों)  में मात्रा और चरित्र दोनों की समानता बनी हुई है।


(iv) मुक्तक छंद क्या है

अनिश्चित, आसमान, मुक्त गति और चरणों की भावात्मक लय ही मुक्तक छंद हैं।


हिंदी के कुछ प्रमुख छंद

हिंदी के कुछ प्रमुख छंद निम्नलिखित है

1. चौपाई क्या होता है

यह एक  सम मात्रिक छंद (समान श्लोक) है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं। पहले श्लोक की कविता दूसरे श्लोक से मिलती है और तीसरे श्लोक का छंद चौथे श्लोक से मिलता है। यति प्रत्येक चरण के अंत में होती है।

चौपाई के उदाहरण :-

जय हनुमान ग्यान गुन सागर।

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर।

राम दूत अतुलित बलधामा।

अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।


2. रोला छंद क्या होता है

रोला एक सम मात्रिक छंद है, जिसमें प्रत्येक चरण में 24 मात्राएं हैं और 11 और 13 पर यति है। प्रत्येक चरण के अंत में दो गुरु या दो लघु अक्षर होते हैं। कविता दो चरणों में आवश्यक है।

रोला छंद के उदाहरण:-

नित नव लीला ललित ठानि गोलोक अजिर में।

रमत राधिका संग रास रस रंग रुचिर में। ।


3. हरिगीतिका छंद क्या होता है

यह एक सम मात्रिक छंद है। इसके प्रत्येक चरण में 28 मात्राएं होती है। यति 16 और 12 पर होती है तथा अंत में लघु और गुरु का प्रयोग होता है।

हरिगीतिका छंद के उदाहरण :-

कहते हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गये।

हिम के कणों से पूर्ण मानो हो गये पंकज नये।


4. दोहा छंद क्या होता है

दोहा छंद एक अर्द्ध सम मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। इसके विषम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 और सम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएं होती हैं।

दोहा छंद के उदाहरण :-

मेरी भव बाधा हरो, राधा नागर सोय।

जा तन की झाई परे, स्याम हरित दुति होय। ।

इसके दूसरे और चौथे चरण में के अंत में गुरु-लघु होता है। पहले और तीसरे चरण के आरंभ में जगण नहीं होता है।


5. सोरठा छंद क्या होता है

सोरठा एक अर्द्ध सम मात्रिक छंद (श्लोक) है। यह दोहे का उल्टा है। इसकी विषम अवस्थाओं में 11-11 मात्राएँ और सम अवस्थाओं में 13-13 मात्राएँ होती हैं। सोरठा  छंद में तुक पहले और तीसरे चरण में है।

सोरठा छंद के उदाहरण :-

कुंद इंदु सम देह, उमा रमन करुना अयन।

जाहि दीन पर नेह, करहु कृपा मर्दन मयन॥


6. वरवै छंद क्या होता है

यह अर्द्ध सम मात्रिक छंद (श्लोक) है। इसके विषम चरणों में 12-12 और सम चरणों में 7-7 मात्राएं होते हैं। यति प्रत्येक चरण के अंत में होती है।

वरवै छंद के उदाहरण :-

वाम अंग शिव शोभित, शिवा उदार।

सरद सुवारिद में जनु, तड़ित बिहार॥


7. कुंडलिया क्या होता है

कुंडलिया एक विषम मात्रिक संयुक्त छंद (श्लोक) है जिसमें चार चरण हैं। इसमें एक दोहा और एक रोला होता है। दोहे का चौथा श्लोक रोला के पहले श्लोक में दोहराया जाता है और दोहे का केवल पहला शब्दांश रोला के अंत में आता है। इस प्रकार जिस शब्द से कुंडली की शुरुआत होती है, उसी के साथ उसका अंत भी होता है।

कुण्डलिया के उदाहरण :-

साईं अपने भ्रात को, कबहुं न दीजै त्रास।

पलक दूर नहिं कीजिये, सदा राखिये पास।

सदा राखिये पास, त्रास, कबहु नहिं दीजै।

त्रास दियौ लंकेश ताहि की गति सुन लीजै।

कह गिरिधर कविराय, राम सों मिलिगौ जाई।

पाय विभीशण राज, लंकपति बाजयो साईं।


8. छप्पय क्या होता है

यह एक विषम मात्रिक श्लोक है। इसमें 6 चरण होते हैं - छप्पय में उलाला के सम-विषम चरणों का योग 15+13=28 मात्राओं के साथ अधिक प्रचलित है।

छप्पय के उदाहरण :-

जहाँ स्वतंत्र विचार न बदले मन में मुख में।

जहाँ न बाधक बनें, सबल निबलों के सुख में।

सब को जहाँ समान निजोन्नति का अवसर हो।

शांतिदायिनी निशा हर्ष सूचक वासर हो।

सब भाँति सुशासित हों जहाँ समता के सुखकर नियम।

View Details

Hindi Ras ke prakar :  पिछले अध्याय में हमने रस की परिभाषा तथा अंग पढ़ा। इस लेख के हम रस के प्रकार के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। चलिये शुरू करते हैं।

रस के प्रकार |  Ras ke Prakar

रसों की संख्या 9 है। वास्तव में रस नौ ही प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं इसलिए रसों की संख्या 11 हो जाती है।
  1. श्रंगार रस
  2. हास्य रस
  3. वीर रस
  4. करुण रस
  5. शांत रस
  6. अदभुत रस
  7. भयानक रस
  8. रौद्र रस
  9. वीभत्स रस
  10. वात्सल्य रस
  11. भक्ति रस

1. श्रृंगार रस की परिभाषा

श्रृंगार रस में नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस के अवस्था में पहुंच जाता है तो वह श्रृंगार रस कहलाता है। इसका स्थायी भाव रति होता हैं। श्रृंगार रस को "रसराज" भी कहा जाता है।

श्रृंगार रस के उदाहरण :-

तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
झके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाये।।

2. हास्य रस की परिभाषा

जहां कुछ अजीब स्थितियों या परिस्थितियों के कारण हास्य उत्पन्न होता है, उसे हास्य रस कहा जाता है।  इसकी स्थायी भावना हास (कम) हो जाती है।

हास्य रस के उदाहरण :-

विंध्य के वासी उदासी, तपोव्रत धारी महा बिनु नारि दुखारे,
गौतमतीय तरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनिवृन्द सुखारे।
है है शिला सब चंद्र मुखी, परसे पद मंजुल कंज तिहारे,
कीन्हीं भली रघुनायक जू कंरूणा करि कानन कौ पग धारे। ।

3. वीर रस की परिभाषा

जब युद्ध या कठिन कार्य को करने के लिए मन में जो उत्साह की भावना जागृत होती है उसे ही वीर रस कहा जाता है। वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है।

वीर रस के उदाहरण :-

साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के
नदी नाद मद गैबरन के रलत हैं।।

4. करुण रस की परिभाषा :-

करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है करुणा रस में, किसी का विनाश या स्वयं से अलगाव, तरलता का विनाश और प्रेमी से अलगाव का दुख या दर्द उत्पन्न होता है। उसे करुण रस कहा जाता है।

करुण रस के उदाहरण :-

मणि खोये भुजंग-सी जननी,
फन-सा पटक रही थी शीश,
अन्धी आज बनाकर मुझको,
क्या न्याय किया तुमने जगदीश।

5. शांत रस की परिभाषा

शांत रस का स्थायी भाव निर्वेद होता है। शांत रस में तात्विक ज्ञान की प्राप्ति या संसार से वैराग्य होने पर, परम आत्मा के वास्तविक रूप का ज्ञान प्राप्त करने पर मन को जो शांति मिलती है, वहां शांत रस उत्पन्न होता है।

शांत रस के उदाहरण 

जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं,
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं।

6. अदभुत रस की परिभाषा

अदभुत रस का स्थायी भाव आश्चर्य होता है। जब किसी व्यक्ति के मन में अजीबोगरीब या आश्चर्यजनक चीजें देखकर विस्मय आदि की भावना पैदा होती है, तो उसे अद्भुत रस कहा जाता है। इसमें रोमांच, चक्कर आना, कांपना, आंखों में आंसू आदि की भावनाएं व्यक्त की जाती हैं।

अदभुत रस के उदाहरण :-

देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया,
क्षणभर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया।

7. भयानक रस की परिभाषा

भयानक रस का स्थायी भाव भय होता है। जब किसी भयानक अथवा अनिष्टकारी व्यक्ति या वस्तु को देखने अथवा उससे सम्बंधित वर्णन करने या किसी अनिष्टकारी घटना का स्मरण करने से मन में जो व्याकुलता जागृत होती है उसे भय कहा जाता है, तथा उस भय के उत्पन्न होने के कारण जिस रस कि उत्पत्ति होती है उस रास को भयानक रस कहा जाता है। इसके अंतर्गत पसीना छूटना,कम्पन, चिन्ता, मुँह सूखना, आदि के भाव उत्पन्न होते हैं।

भयानक रस के उदाहरण :-

एक ओर अजगर हिं लखि एक ओर मृगराय,
विकल बटोही बीच ही, पद्यो मूर्च्छा खाय।

8. रौद्र रस की परिभाषा

रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध है, अर्थात जब एक पक्ष या व्यक्ति दूसरे पक्ष या अन्य व्यक्ति का अपमान करता है या अपने शिक्षक आदि की निन्दा के कारण उत्पन्न होने वाला क्रोध, रौद्र रस कहलाता है।

रौद्र रस के उदाहरण :-

उस काल मरे क्रोध के तन काँपने उसका लगा
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।

9.वीभत्स रस की परिभाषा

वीभत्स रस का स्थायी भाव जुगुप्सा होता है। इसमें घृणित वस्तुओं, घृणित चीजो या घृणित व्यक्ति को देखकर अथवा उनके संबंध में विचार करके अथवा उनके सम्बन्ध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा या ग्लानि ही वीभत्स रस कि पुष्टि करती है।

वीभत्स रस के उदाहरण :-

बहु चील्ह नोंचि ले जात तुच, मोद मठ्यो सबको हियो
जनु ब्रह्म भोज जिजमान कोउ, आज भिखारिन कहुँ दियो।

10. वात्सल्य रस की परिभाषा

वात्सल्य रस का स्थायी भाव वात्सल्य रति होता है। इस रस में बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम,माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।

वात्सल्य रस के उदाहरण उदाहरण :-

जसोदा हरि पालनैं झुलावै।
हलरावै, दुलरावै मल्हावै, जोइ सोइ, कछु गावै।

11. भक्ति रस की परिभाषा

भक्ति रस का स्थायी भाव देव रति होता है, इस रस में ईश्वर के प्रेम और स्नेह का वर्णन किया गया है। अर्थात् इस रस में ईश्वर के प्रति प्रेम का वर्णन किया जाता है।

भक्ति रस के उदाहरण :-

एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास,
एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास। 


View Details
Notification
This is just an example, you can fill it later with your own note.
Done