Hindi OS -->
Professional Themes

Showing themes that are Seo, fast loading, light, fresh and professional.

Hindi Ras ke prakar :  पिछले अध्याय में हमने रस की परिभाषा तथा अंग पढ़ा। इस लेख के हम रस के प्रकार के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। चलिये शुरू करते हैं।

रस के प्रकार |  Ras ke Prakar

रसों की संख्या 9 है। वास्तव में रस नौ ही प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं इसलिए रसों की संख्या 11 हो जाती है।
  1. श्रंगार रस
  2. हास्य रस
  3. वीर रस
  4. करुण रस
  5. शांत रस
  6. अदभुत रस
  7. भयानक रस
  8. रौद्र रस
  9. वीभत्स रस
  10. वात्सल्य रस
  11. भक्ति रस

1. श्रृंगार रस की परिभाषा

श्रृंगार रस में नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस के अवस्था में पहुंच जाता है तो वह श्रृंगार रस कहलाता है। इसका स्थायी भाव रति होता हैं। श्रृंगार रस को "रसराज" भी कहा जाता है।

श्रृंगार रस के उदाहरण :-

तरनि तनुजा तट तमाल तरुवर बहु छाये।
झके कूल सों जल परसन हित मनहुँ सुहाये।।

2. हास्य रस की परिभाषा

जहां कुछ अजीब स्थितियों या परिस्थितियों के कारण हास्य उत्पन्न होता है, उसे हास्य रस कहा जाता है।  इसकी स्थायी भावना हास (कम) हो जाती है।

हास्य रस के उदाहरण :-

विंध्य के वासी उदासी, तपोव्रत धारी महा बिनु नारि दुखारे,
गौतमतीय तरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनिवृन्द सुखारे।
है है शिला सब चंद्र मुखी, परसे पद मंजुल कंज तिहारे,
कीन्हीं भली रघुनायक जू कंरूणा करि कानन कौ पग धारे। ।

3. वीर रस की परिभाषा

जब युद्ध या कठिन कार्य को करने के लिए मन में जो उत्साह की भावना जागृत होती है उसे ही वीर रस कहा जाता है। वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है।

वीर रस के उदाहरण :-

साजि चतुरंग सैन अंग में उमंग धारि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत हैं।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के
नदी नाद मद गैबरन के रलत हैं।।

4. करुण रस की परिभाषा :-

करुण रस का स्थायी भाव शोक होता है करुणा रस में, किसी का विनाश या स्वयं से अलगाव, तरलता का विनाश और प्रेमी से अलगाव का दुख या दर्द उत्पन्न होता है। उसे करुण रस कहा जाता है।

करुण रस के उदाहरण :-

मणि खोये भुजंग-सी जननी,
फन-सा पटक रही थी शीश,
अन्धी आज बनाकर मुझको,
क्या न्याय किया तुमने जगदीश।

5. शांत रस की परिभाषा

शांत रस का स्थायी भाव निर्वेद होता है। शांत रस में तात्विक ज्ञान की प्राप्ति या संसार से वैराग्य होने पर, परम आत्मा के वास्तविक रूप का ज्ञान प्राप्त करने पर मन को जो शांति मिलती है, वहां शांत रस उत्पन्न होता है।

शांत रस के उदाहरण 

जब मै था तब हरि नाहिं अब हरि है मै नाहिं,
सब अँधियारा मिट गया जब दीपक देख्या माहिं।

6. अदभुत रस की परिभाषा

अदभुत रस का स्थायी भाव आश्चर्य होता है। जब किसी व्यक्ति के मन में अजीबोगरीब या आश्चर्यजनक चीजें देखकर विस्मय आदि की भावना पैदा होती है, तो उसे अद्भुत रस कहा जाता है। इसमें रोमांच, चक्कर आना, कांपना, आंखों में आंसू आदि की भावनाएं व्यक्त की जाती हैं।

अदभुत रस के उदाहरण :-

देख यशोदा शिशु के मुख में, सकल विश्व की माया,
क्षणभर को वह बनी अचेतन, हिल न सकी कोमल काया।

7. भयानक रस की परिभाषा

भयानक रस का स्थायी भाव भय होता है। जब किसी भयानक अथवा अनिष्टकारी व्यक्ति या वस्तु को देखने अथवा उससे सम्बंधित वर्णन करने या किसी अनिष्टकारी घटना का स्मरण करने से मन में जो व्याकुलता जागृत होती है उसे भय कहा जाता है, तथा उस भय के उत्पन्न होने के कारण जिस रस कि उत्पत्ति होती है उस रास को भयानक रस कहा जाता है। इसके अंतर्गत पसीना छूटना,कम्पन, चिन्ता, मुँह सूखना, आदि के भाव उत्पन्न होते हैं।

भयानक रस के उदाहरण :-

एक ओर अजगर हिं लखि एक ओर मृगराय,
विकल बटोही बीच ही, पद्यो मूर्च्छा खाय।

8. रौद्र रस की परिभाषा

रौद्र रस का स्थायी भाव क्रोध है, अर्थात जब एक पक्ष या व्यक्ति दूसरे पक्ष या अन्य व्यक्ति का अपमान करता है या अपने शिक्षक आदि की निन्दा के कारण उत्पन्न होने वाला क्रोध, रौद्र रस कहलाता है।

रौद्र रस के उदाहरण :-

उस काल मरे क्रोध के तन काँपने उसका लगा
मानो हवा के जोर से सोता हुआ सागर जगा।

9.वीभत्स रस की परिभाषा

वीभत्स रस का स्थायी भाव जुगुप्सा होता है। इसमें घृणित वस्तुओं, घृणित चीजो या घृणित व्यक्ति को देखकर अथवा उनके संबंध में विचार करके अथवा उनके सम्बन्ध में सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा या ग्लानि ही वीभत्स रस कि पुष्टि करती है।

वीभत्स रस के उदाहरण :-

बहु चील्ह नोंचि ले जात तुच, मोद मठ्यो सबको हियो
जनु ब्रह्म भोज जिजमान कोउ, आज भिखारिन कहुँ दियो।

10. वात्सल्य रस की परिभाषा

वात्सल्य रस का स्थायी भाव वात्सल्य रति होता है। इस रस में बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम,माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।

वात्सल्य रस के उदाहरण उदाहरण :-

जसोदा हरि पालनैं झुलावै।
हलरावै, दुलरावै मल्हावै, जोइ सोइ, कछु गावै।

11. भक्ति रस की परिभाषा

भक्ति रस का स्थायी भाव देव रति होता है, इस रस में ईश्वर के प्रेम और स्नेह का वर्णन किया गया है। अर्थात् इस रस में ईश्वर के प्रति प्रेम का वर्णन किया जाता है।

भक्ति रस के उदाहरण :-

एक भरोसो एक बल, एक आस विश्वास,
एक राम घनश्याम हित, चातक तुलसीदास। 


View Details

Ras ki paribhasha - यदि आप रस पढ़ना चाहते हैं तो यहाँ पर रस क्या है, अंग, प्रकार, उदाहरण सहित प्रकाशित किया गया है। चलिये सबसे पहले यह जान लेते हैं कि रस किसे कहते हैं।


रस किसे कहते हैं | Ras kise kahate hain

रस जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है सुख, आनंद, मजा इत्यादि। इस प्रकार रस का शाब्दिक अर्थ होता है "आनंद"

इसलिए हम रस की परिभाषा कुछ इस प्रकार दे सकते हैं 

Ras Kise Kahate Hain- 'किसी काव्य को पढ़कर या सुनकर मन में जो आनंद का भाव उत्पन्न होता है, उसे रस कहते हैं।'

Ras kise kahate hain


रस के  कितने अंग होते हैं | Ras ke Ang

रस के चार अंग होते है, जो निम्नलिखित हैं।
  1. स्थाई भाव
  2. अनुभाव
  3. विभाव
  4. संचारी भाव

1. स्थाई भाव क्या है

स्थाई भाव का अर्थ होता है प्रधान भाव। प्रधान भाव वही हो सकता है जो रस की अवस्था तक पहुंचता है। काव्य या नाटक में शुरू से आखिर तक एक स्थाई भाव होता है। स्थाई भाव की संख्या 9 मानी गई है। स्थाई भाव ही रस का आधार है। एक रस के मूल में एक स्थाई भाव रहता है। 

अतः रसों की संख्या भी 9 होती है। इन्हें नवरस भी कहते हैं। मूल रूप से नवरस ही माने जाते हैं। बाद में आचार्यों ने दो और भावों (वात्सल्य व भगवत विषयक रति) को स्थाई भाव के रूप में मान्यता दी। इस प्रकार स्थाई भाव की संख्या 11 तक पहुंच जाती है और तदनुरूप रसों की संख्या भी 11 तक पहुंच जाती है।


2. अनुभाव क्या है

मनोगत भावनाओं को व्यक्त करने वाले शरीर-विकार अनुभव कहलाते हैं।  अनुभवों की संख्या 8 मानी जाती है।
  1. स्तंभ
  2. स्वेद
  3. रोमांच
  4. स्वर भंग
  5. कम्प
  6. विवर्णता
  7. अश्रु
  8. प्रलय

3. विभाव क्या है

स्थाई भावों के उद् भोदक कारण को विभाव कहते हैं। विभाग दो प्रकार के होते हैं।
  • आलंबन विभाव
  • उद्दीपन विभाव

i. आलम्बन विभाव:

जिसका आलम्बन या सहारा पाकर स्थायी भाव जगते है आलम्बन विभाव कहलाता है। जैसे नायक- नायिका। आलम्बन विभाव के दो पछ होते हैं-आश्रयालंबन व विसयालम्बन। जिसके मन में भाव जगे वह आश्रयालंबन व जिसके प्रति या जिसके कारणं भाव जगे वह विसयालम्बन कहलाता है।

जैसे :- यदि राम के मन में सीता के प्रति रति का भाव जगता है तो राम आश्रय होंगे और सीता विषय।

ii. उद्दीपन विभाव:-

-जिन वस्तुओं या परिस्थितियों को देखकर स्थाई भाव उद्दीप्त होने लगता है उद्दीपन विभाव कहलाता है।

जैसे :- चांदनी, कोकिल कूजन, एकांत स्थल, रमणीक उद्यान, नायक या नायिका की शारीरिक चेस्टाऐं

4. संचारी भाव क्या है

मन में संचरण करने वाले (आने- जाने वाले ) भावों को संचारी या व्यभिचारी भाव कहते हैं। संचारी भावों की कुल संख्या 33 मानी गई है।

निर्वेद, ग्लानि, शंका, असूया, मद, श्रम, आलस्य, देन्य, चिंता, मोह, स्मृति, घृति, ब्रीडा, चपलता, हर्ष, आवेग, जड़ता, गर्व, विषाद, औत्सुक्य, निद्रा, अपस्मार, स्वप्न, विबोध, अमर्ष, अविहित्था, उग्रता, मति, व्याधि, उन्माद, मरण, वितर्क

रस के प्रकार |  Ras ke Prakar

रसों की संख्या 9 है। वास्तव में रस नौ ही प्रकार के होते हैं परन्तु वात्सल्य एवं भक्ति को भी रस माना गया हैं इसलिए रसों की संख्या 11 हो जाती है।

1. श्रंगार रस

2. हास्य रस

3. वीर रस

4. करुण रस

5. शांत रस

6. अदभुत रस

7. भयानक रस

8. रौद्र रस

9. वीभत्स रस

10. वात्सल्य रस

11. भक्ति रस


दोस्तो उम्मीद करता हूँ कि आप जान गए होंगे कि रस की किसे कहते हैं और रस के कितने अंग होते हैं। आप यहाँ पर व्याकरण से सम्बंधित और भी टॉपिक हिंदी में पढ़ सकते हैं।

View Details
दोस्तो यदि आप समझ के बारे में विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो आप सही जगह हैं। क्योंकि इस लेख समास क्या है, समास विग्रह क्या है, समास के कितने भेद होते हैं इत्यादि का वर्णन विस्तृत रूप से किया गया है।

समास क्या है | Samas Kya hai

जहाँ पर अधिक से अधिक अर्थ को कम-से-कम शब्दों में
प्रकट किया जाए वह समास कहलाता है।

Samas Kise Kahate Hain | Samas Ki Paribhasha

समास की परिभाषा - जब दो या दो से अधिक शब्दों से मिलकर जो नया और छोटा शब्द बनता है उस शब्द को समास कहते हैं। 

समास क्या है - परिभाषा, भेद तथा उदाहरण
समास क्या है - परिभाषा, भेद तथा उदाहरण

समास विग्रह क्या है | समास विग्रह किसे कहते हैं

संपूर्ण पद के सभी पदों को अलग करने की प्रक्रिया को समास-विग्रह या व्यास कहा जाता है।

समास विग्रह के उदाहरण

नीलकमल का विग्रह है- "नीला है जो कमल"
चौराहा का विग्रह है - चार राहों का समूह।

• समास रचना में प्रायः दो पद होते हैं। पहले को पूर्व पद और दूसरे को कहा जाता है।

उदाहरण:- "राजपुत्र" में पूर्वपद "राज" है और उत्तरपद "पुत्र" है।

• समास प्रक्रिया में पदों के बीच की विभक्तियां लुप्त हो जाती हैं।

उदाहरण:- राजा का पुत्र =राजपुत्र, यहाँ पर विभक्ति का लोप हो गया है।

हम लोग समास की परिभाषा जान गए। आइये अब हम जान लेते हैं कि समास के कितने भेद के होते हैं।


Samas ke kitne bhed hote hai | समास के भेद

समास के मुख्यतः 6 भेद होते हैं जो निम्नलिखित हैं।

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वंद्व समास
  6. बहुव्रीहि समास

ये समास के मुख्य 6 भेद हैं। आइए हम एक-एक करके इन सभी समास के बारे में जान लेते हैं।


1. अव्ययीभाव समास किसे कहते हैं | Avyayibhav samas

अव्ययीभाव समास की परिभाषा- इस समास में शब्द का प्रथम पद अव्यय होता है और उसका अर्थ प्रधान होता है, इसीलिए इसे अव्ययीभाव समास कहा जाता है।
अव्यय, यानी जिस पद का प्रारूप लिंग, वचन और कारक की स्थिति में एक समान ही रहे।

अव्ययीभाव समास का उदाहरण

प्रतिदिन = प्रत्येक दिन
यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार
आजन्म = जन्म से लेकर

यहाँ प्रति, यथा, आ आदि कुछ अव्यय हैं। स्त्रीलिंग या पुल्लिंग के साथ प्रयोग करने पर इन शब्दांशों में कोई परिवर्तन नहीं आएगा।


2. तत्पुरुष समास किसे कहते हैं | Tatpurush Samas

तत्पुरुष समास की परिभाषा- जिस समास में दूसरा पद प्रधान होता है, उसे तत्पुरुष समास कहा जाता है। यह कारक से जुड़ा होता है। विग्रह करने पर जो कारक प्रकट होता है, उसी कारक के अनुसार समास का उप-प्रकार निर्धारित किया जाता है। इस समास में दो पदों के बीच कारक को चिन्हित करने वाले शब्दों का लोप हो जाता है, इसीलिए इसे तत्पुरुष समास कहा जाता है।

तत्पुरुष समास के उदाहरण

तुलसी द्वारा कृत = तुलसीकृत
राजा का महल = राजमहल
देश के लिए भक्ति = देशभक्ति
राह के लिए खर्च = राहखर्च


तत्पुरुष समास के कितने भेद होते हैं | Tatpurush Samas Ke Bhed

तत्पुरुष समास के 6 प्रकार होते हैं जो निम्नलिखित हैं

i. कर्म तत्पुरुष समास
ii. करण तत्पुरुष समास
iii. सम्प्रदान तत्पुरुष समास
iv. अपादान तत्पुरुष समास
v. सम्बन्ध तत्पुरुष समास
vi. अधिकरण तत्पुरुष समास

चलिए तत्पुरुष समास के निम्न 6 भेद को थोड़ा सा समझ लेते हैं।

i. कर्म तत्पुरुष समास की परिभाषा

जहाँ दो पदों के बीच कर्म कारक चिन्ह छुपा होता है, उसे कर्म तत्पुरुष समास कहते हैं।

उदाहरण:-
रथचालक – रथ को चलाने वाला।
माखनचोर – माखन को चुराने वाला।
जनप्रिय – जनता को प्रिय।


ii. करण तत्पुरुष समास की परिभाषा

जहाँ दो पदों के बीच करण कारक का बोध होता है, उसे करण तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें करण कारक का चिन्ह ‘के द्वारा’ और ‘से’ होता है।

उदाहरण:-
स्वरचित – स्वयं द्वारा रचित,
शोकग्रस्त – शोक से ग्रस्त


iii. सम्प्रदान तत्पुरुष समास की परिभाषा

इसमें दो पदों के बीच सम्प्रदान कारक छिपा होता है। सम्प्रदान कारक का चिन्ह ‘के लिए’ है।

उदाहरण:-
विद्यालय =विद्या के लिए आलय (घर)
सभाभवन = सभा के लिए भवन


iv. अपादान तत्पुरुष समास की परिभाषा

अपादान तत्पुरुष समास में दो पदों के बीच में अपादान कारक चिन्ह ‘से’ (विभक्ति के संदर्भ में या अलग होने पर) छिपा होता है।

उदाहरण:-
कामचोर = काम से जी चुराने वाला
दूरागत = दूर से आगत
रणविमुख = रण से विमुख


v. सम्बन्ध तत्पुरुष समास की परिभाषा
उत्तर और पूर्व पद के बीच सम्बन्ध कारक के चिन्हों, जैसे कि ‘का’, ‘की’, ‘के’, ‘रा’ , ‘री’, ‘रे’, ‘ना’ , ‘नी’, ‘ने’ आदि के छुपे होने पर सम्बन्ध तत्पुरुष समास होता है।

उदाहरण:-
गंगाजल =गंगा का जल


vi.अधिकरण तत्पुरुष समास की परिभाषा

अधिकरण तत्पुरुष में दो पदों के बीच अधिकरण कारक छिपा होता है। अधिकरण कारक का चिन्ह या विभक्ति ‘ में’, ‘पर’ होता है।

उदाहरण:-
कार्यकुशल = कार्य में कुशल
वनवास = वन में वास


3. कर्मधारय समास किसे कहते हैं | Karmdharay Samas ki Paribhasha

कर्मधारय समास की परिभाषा- जिस समास में उत्तर पद प्रधान होता है और शब्द विशेषण – विशेष्य और उपमेय – उपमान से जुड़कर बनते हैं, उसे कर्मधारय समास कहते हैं

कर्मधारय समास के उदाहरण

चरणकमल = कमल के समान चरण
नीलगगन = नीला है गगन जो
चन्द्रमुख = चन्द्र जैसा मुख


4. द्विगु समास किसे कहते हैं | Dvigu Samas ki Pribhasha

द्विगु समास की परिभाषा- द्विगु समास में उत्तर पद प्रधान होता है और पूर्व पद संख्यावाचक होता है।

द्विगु समास के उदाहरण
जैसे: तीन लोकों का समाहार = त्रिलोक
पाँचों वटों का समाहार = पंचवटी
तीन भुवनों का समाहार =त्रिभुवन

5. द्वंद्व समास किसे कहते हैं | Dwand Samas ki Pribhasha

द्वंद्व समास में दोनों ही पद प्रधान रहते हैं और अधिकतर एक-दूसरे पद के विपरीत होते हैं। कोई भी पद छुपा हुआ नहीं रहता है।

द्वंद समास के उदाहरण
जलवायु = जल और वायु
अपना-पराया = अपना या पराया
पाप-पुण्य = पाप और पुण्य


6. बहुब्रीहि समास किसे कहते हैं | Bahubrihi Samas

जिस समास में कोई भी पद प्रधान ना हो या दो पद मिलकर तीसरा पद बनाते हों और वह तीसरा पद प्रधान होता है, उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं।

बहुब्रीहि समास के उदाहरण
त्रिनेत्र = तीन हैं नेत्र जिसके (शिव)
लम्बोदर = लम्बा है उदर जिसका (गणेश)


अंतिम शब्द-

उम्मीद करता हूं कि आप व्याकरण के मुख्य टॉपिक समास क्या है, परिभाषा तथा समास के भेद उदाहरण सहित समझ गए होंगे यदि आपका किसी प्रकार का सुझाव या सवाल हो तो आप हमें कमेंट कर कर बता सकते हैं।

View Details

उपसर्ग : इस लेख में हम उपसर्ग के बारे में जानेंगे जैसे कि उपसर्ग किसे कहते हैं, उपसर्ग के उदाहरण तथा उपसर्ग (upasarg) कितने प्रकार के होते हैं। 


उपसर्ग किसे कहते हैं | Upasarg kise kahate hain

उपसर्ग की परिभाषा: वे शब्दांश जो किसी शब्द के आरंभ में लगाने पर उसके अर्थ में विशेषता लाते हैं या उसका अर्थ बदलने के लिए लगाए जाते हैं, उपसर्ग कहलाते हैं।

उपसर्ग किसे कहते हैं
उपसर्ग की परिभाषा


उपसर्ग के उदाहरण

परा+कर्म = पराकर्म

परा+जय = पराजय

परा+भव = पराभव

परा+धीन = पराधीन

परा+भूत = पराभूत आदि।


उपसर्ग कितने प्रकार के होते हैं | Upasarg ke prakar

उपसर्ग चार प्रकार के होते है जो निम्नलिखित हैं--

  1. संस्कृत के उपसर्ग
  2. हिंदी के उपसर्ग
  3. उर्दू और फारसी के उपसर्ग
  4. अंग्रेजी के उपसर्ग


1. संस्कृत के उपसर्ग- अप, अभि, अव, आ, अति, अधि, अनु, उप, दुर्, दुस्, उत्, उद्, निर्, निस्, नि, परा, परि, प्र, प्रति, वि, सम्, सु

2. हिंदी के उपसर्ग- अ, अन, क, कु, दु, बिन, नि, औ/अव, भर, सु, अध्, उन, पर

3. उर्दू और फारसी के उपसर्ग- ला, बद, बे, कम, गैर, खुश, ना, अल, बर, बिल, हम, दर, फिल/फी, ब, बा, सर, बिला, हर

4. अंग्रेजी के उपसर्ग- सब, डिप्टी, वाइस, जनरल, चीफ, हेड

उप, दुर्, दुस्उम्मीद है कि आप उपसर्ग की परिभाषा तथा उपसर्ग के प्रकार समझ गए होंगे आपको यह आलेख कैसा लगा हमें जरूर बताएं।


View Details

हेल्लो दोस्तों! इस लेख में हम कारक (karak) किसे कहते हैं तथा कारक कितने प्रकार के होते हैं इत्यादि के बारे में जानेंगे। तो चलिए सबसे पहले कारक की परिभाषा जान लेते हैं।

कारक किसे कहते हैं | karak kise khte hain

कारक की परिभाषा- संज्ञा अथवा सर्वनाम के जिस रुप में वाक्य के अन्य शब्दों के साथ संज्ञा अथवा सर्वनाम का संबंध सूचित हो, उसे कारक कहते हैं।

कारक (karak) किसे कहते हैं | कारक कितने प्रकार के होते हैं

कारक के भेद | karak ke kitne bhed hain

कारक आठ प्रकार के होते हैं।

  1. कर्ता कारक
  2. कर्म कारक
  3. करण कारक
  4. संप्रदान कारक
  5. अपादान कारक
  6. संबंध कारक
  7. अधिकरण कारक
  8. संबोधन कारक


  • कारक------- (चिह्न)
  • कर्ता कारक------- ने
  • कर्म कारक ------- को
  • करण कारक------- से
  • संप्रदान कारक------- को, के लिए
  • अपादान कारक------- से, अलगहोना
  • संबंध कारक------- का, की, के, रा, री, रे
  • अधिकरण कारक------- में, पर
  • संबोधन कारक------- हे !, अरे !
View Details

प्रत्यय : क्या आप प्रत्यय की परिभाषा खोज रहे हैं? तो इस लेख को पूरा पढ़िए, क्योंकि इस लेख में प्रत्यय से जुड़ी सभी जानकारी का विस्तृत वर्णन किया गया है। चलिये सबसे पहले यह जान लेते हैं कि प्रत्यय किसे कहते हैं।


प्रत्यय किसे कहते हैं?

प्रत्यय की परिभाषा- वे शब्दांश जो किसी शब्द के अंत में लगकर उनके अर्थ को बदल देते है, प्रत्यय कहलाते हैं।

प्रत्यय के उदाहरण :-

  • सब्जी + वाला = सब्जीवाला
  • लिखा + आवत = लिखावट

प्रत्यय किसे कहते हैं?


प्रत्यय की परिभाषा तो आपलोग समझ गए अब यह जान लेते है की प्रत्यय कितने प्रकार के होते हैं।

प्रत्यय के प्रकार

प्रत्यय तीन प्रकार के होते हैं।

  1. संस्कृत के प्रत्यय
  2. हिंदी के प्रत्यय 
  3. विदेशी भाषा के प्रत्यय


ऊपर हमने तीन प्रकार के प्रत्यय को बताया है। इसमें से हम हिंदी के प्रत्यय को विस्तृत रूप से पढ़ेंगे। तो चलिए यह जान लेते हैं कि हिंदी प्रत्यय के कितने भेद होते हैं।

प्रत्यय के भेद:-

प्रत्यय के मुख्यतः दो भेद हैं।

1. कृत प्रत्यय

2. तद्धित प्रत्यय


1. कृत प्रत्यय किसे कहते हैं

कृत प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप अर्थात मूल धातु में जुड़ते हैं, कृत् प्रत्यय कहलाते हैं।  कृत प्रत्यय से बने शब्दों को कृदंत कहते हैं।

जैसे :-

लेख +अक = लेखक। यहां अक कृत प्रत्यय है तथा लेखक कृदंत शब्द है।


2. तद्धित प्रत्यय किसे कहते हैं

तध्दित प्रत्यय की परिभाषा- वे प्रत्यय जो क्रिया के मूल रूप यानी धातु को छोड़कर अन्य शब्दों- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण व अवयव में जुड़ते हैं तद्धित प्रत्यय कहलाते हैं। तद्धित प्रत्यय से बने शब्द तद्धितांत शब्द का लाते हैं।

जैसे :-

सेठ +आनी= सेठानी। यहां आनी तद्धित प्रत्यय है तथा सेठानी तद्धित शब्द है।


प्रत्यय के कुछ महत्वपूर्ण नोट्स :-

i. प्रत्ययों का अपना कुछ भी अर्थ नहीं होता है और न ही इनका प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जाता है।

ii. हिंदी के प्रायः सभी प्रत्ययों कृत और तद्धित, संस्कृत के कृत और तद्धित प्रत्यय से ही विकसित हुए हैं।

View Details
हेल्लो दोस्तों! आज हम 'काल' के बारे में जानेंगे। क्या आप जानते हैं, काल किसे कहते हैं, काल के कितने भेद होते हैं। इस लेख में हम इन सभी के बारे में विस्तार से जानेंगे। तो चलिए सबसे पहले काल की परिभाषा जान लेते हैं।

काल किसे कहते हैं | Kal kise kahate hain

काल की परिभाषा- क्रिया के जिस रूप से कार्य करने या होने के समय का ज्ञान होता है उसे 'काल' कहते है।

दूसरे शब्दों में- क्रिया के उस रूप को काल कहते हैं, जो उसके कार्य के समय और उसकी पूर्ण या अपूर्ण अवस्था का बोध कराता है।

जैसे :-
  •  बच्चे खेल रहे हैं। 
  •  बच्चे खेल रहे थे। 
  •  बच्चे खेलेंगे। 

  • पहले वाक्य में क्रिया वर्तमान समय में हो रही है। 
  • जैसे - (मैडम पढ़ा रही हैं।)

  • दूसरे वाक्य में क्रिया पहले ही समाप्त हो चुकी थी।
  • जैसे - (मैडम पढ़ा रही थी।)

  • और तीसरे वाक्य में क्रिया भविष्य में होगी।  
  • जैसे - (मैडम पढ़ायेंगी।)

इन वाक्यों की क्रियाएँ कार्य के समय को दर्शाती हैं।

काल किसे कहते हैं

काल के कितने भेद होते हैं | kaal ke bhed

काल के निम्न तीन भेद होते है।

  1. वर्तमान काल - जो समय चल रहा है।
  2. भूतकाल - जो समय बीत चुका है।
  3. भविष्यत काल- जो समय आने वाला है।

1. वर्तमान काल | vartman kal kise kahate hain

वर्तमान काल की परिभाषा:- क्रिया का वह रूप जो वर्तमान में चल रहे समय का बोध कराता है, वर्तमान काल कहलाता है।

जैसे :-

  • पिता जी समाचार सुन रहे हैं।
  • पुजारी पूजा कर रहा है।
  • प्रियंका स्कूल जाती हैं।

उपरोक्त वाक्यों में क्रिया का वर्तमान काल ज्ञात किया जा रहा है।  अतः ये सभी क्रियाएँ वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

वर्तमान काल की पहचान क्या है

वर्तमान कल की पहचान के लिए वाक्य के अन्त में 'ता, ती, ते, है, हैं' आदि आते है।


वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं | vartman kal ke bhed

वर्तमान काल के पाँच भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य वर्तमानकाल
  2. तत्कालिक वर्तमानकाल
  3. पूर्ण वर्तमानकाल
  4. संदिग्ध वर्तमानकाल
  5. संभाव्य वर्तमानकाल

i) सामान्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं

क्रिया का वह रूप जिसमें क्रिया वर्तमान काल में होती है, 'सामान्य वर्तमान काल' कहलाती है।

दूसरे शब्दों में- वर्तमान काल में होने वाली क्रिया को सरल वर्तमान काल क्रिया कहते हैं।

जैसे :-
  • वह आता है।
  • वह देखता है।
  • दादी माला जपती हैं।

ii) तत्कालिक वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे यह पता चलता है कि क्रिया वर्तमानकाल में हो रही है।

जैसे :-
  • मै पढ़ रहा हूँ।
  • वह जा रहा है।

iii) पूर्ण वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे वर्तमानकाल में कार्य की पूर्ण सिद्धि का बोध होता है।

जैसे :-
  • वह आया है।
  • सीता ने पुस्तक पढ़ी है।

iv) संदिग्ध वर्तमानकाल किसे कहते हैं

जिसमें क्रिया के अस्तित्व पर संदेह हो, लेकिन वर्तमान काल में उस पर संदेह न हो।  इसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं।

सरल शब्दों में- जिस क्रिया का वर्तमान काल में पूरा होना संदेहास्पद होता है, उसे संदिग्ध वर्तमान काल कहते हैं

जैसे :-
  • राम खाता होगा।
  • वह पढ़ता होगा।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाओं के होने में संदेह है। अतः ये संदिग्ध वर्तमान काल की क्रियाएँ हैं।

v) सम्भाव्य वर्तमानकाल किसे कहते हैं

इससे वर्तमानकाल में काम के पूरा होने की सम्भवना रहती है।

जैसे :-
  • वह आया हो।
  • वह लौटा हो।


2. भूतकाल किसे कहते हैं |bhutkal kise khte hai

भूतकाल की परिभाषा:- क्रिया के जिस रूप से बीते हुए समय का ज्ञान होता है, उसे भूतकाल कहते है।

सरल शब्दों में- जिससे क्रिया से कार्य की समाप्ति का बोध होता है, उसे भूतकाल की क्रिया कहते हैं।

जैसे :-

  • वह खा चुका था ।
  • राम ने अपना पाठ याद किया।
  • मैंने पुस्तक पढ़ ली थी।

उपरोक्त सभी वाक्य कर्म के भूतकाल के होने का आभास दे रहे हैं। तो ये भूतकाल के वाक्य हैं।

भूतकाल की पहचान क्या है 

भूतकाल की पहचान के लिए वाक्य के अंत में 'था, था, था' आदि आते हैं।

भूतकाल के कितने भेद हैं | bhutkal ke kitne bhed hote hain

भूतकाल के छह भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।
  1. सामान्य भूतकाल
  2. आसन भूतकाल
  3. पूर्ण भूतकाल
  4. अपूर्ण भूतकाल
  5. संदिग्ध भूतकाल
  6. हेतुहेतुमद् भूत

i) सामान्य भूतकाल की परिभाषा

जिससे भूतकाल की क्रिया के विशिष्ट समय का ज्ञान न हो, इसे सामान्य भूतकाल कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जो भूतकाल में किए गए कार्य के पूरा होने का बोध कराता है, सरल भूतकाल कहलाता है।

जैसे :-

  • मोहन आया।
  • सीता गयी।
  • श्रीराम ने रावण को मारा।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ बीते हुए समय में पूरी हो गई। अतः ये सामान्य भूतकाल की क्रियाएँ हैं।


ii) आसन्न भूतकाल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि क्रिया अभी कुछ समय पहले पूरी हुई है, आसन्न भूतकाल कहलाती है।

इसके साथ, कार्रवाई की समाप्ति निकट अतीत में या तुरंत इंगित की जाती है।

जैसे :-

  • मैने आम खाया हैं।
  • मैं अभी सोकर उठी हूँ।
  • अध्यापिका पढ़ाकर आई हैं।
उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ अभी-अभी पूर्ण हुई हैं। इसलिए ये आसन्न भूतकाल की क्रियाएँ हैं।

iii) पूर्ण भूतकाल की परिभाषा

क्रिया के उस रूप को पूर्ण भूतकाल कहा जाता है, जो क्रिया के अंत के समय की स्पष्ट बोध देता है कि क्रिया को समाप्त हुए एक लंबा समय बीत चुका है।

क्रिया का वह रूप जो क्रिया के बहुत पहले पूरा होने का संकेत देता है, पूर्ण भूतकाल कहलाता है।

जैसे :

  • उसने श्याम को मारा था।
  • अंग्रेजों ने भारत पर राज किया था।
  • महादेवी वर्मा ने संस्मरण लिखे थे।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया अपने भूतकाल में पूर्ण हुई थी।  तो ये पूर्ण भूत काल की क्रियाएं हैं।

पूर्ण भूतकाल में क्रिया के साथ 'था, थी, थे, चुका था, चुकी थी, चुके थे आदि लगता है।

iv) अपूर्ण भूतकाल की परिभाषा

इससे ज्ञात होता है कि क्रिया भूतकाल में हो रही थी, परन्तु उसके अन्त का पता नहीं है।

जैसे :-

  • सुरेश गीत गा रहा था।
  • रीता सो रही थी।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया इंगित करती है कि क्रिया अतीत में शुरू हुई है और अभी तक पूरी नहीं हुई है।  तो ये अपूर्ण भूतकाल क्रिया हैं।

v) संदिग्ध भूतकाल की परिभाषा

भूतकाल में क्रिया के जिस रूप में इसके पूरा होने पर संदेह होता है, उसे संदिग्ध भूतकाल कहा जाता है।
पूर्व में काम पूरा हुआ या नहीं, इस पर संशय बना हुआ है।

जैसे :-

  • तू गाया होगा।
  • बस छूट गई होगी।
  • दुकानें बंद हो चुकी होगी।
उपरोक्त वाक्यों की क्रिया भूतकाल में कार्य के पूरा होने के बारे में संदेह प्रकट करती है।  तो ये संदिग्ध भूतकाल की क्रियाएं हैं।

vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल की परिभाषा

यदि भूतकाल में एक क्रिया के होने या न होने पर दूसरी क्रिया का होना या न होना निर्भर करता है, तो वह हेतुहेतुमद् भूतकाल क्रिया कहलाती है। इससे यह पता चलता है कि क्रिया भूतकाल में होनेवाली थी, पर किसी कारण न हो सका।

जैसे :-

  • यदि तुमने परिश्रम किया होता, तो पास हो जाते।
  • यदि वर्षा होती, तो फसल अच्छी होती।

उपर्युक्त वाक्यों की क्रियाएँ एक-दूसरे पर निर्भर हैं। पहली क्रिया के न होने पर दूसरी क्रिया भी पूरी नहीं होती है। अतः ये हेतुहेतुमद् भूतकाल की क्रियाएँ हैं।


3. भविष्य काल किसे कहते हैं | bhavishy kal kise kahate hai

भविष्य काल की परिभाषा:- भविष्य में होने वाली क्रिया को भविष्य काल क्रिया कहते हैं।

दूसरे शब्दों में- क्रिया का वह रूप जिसमें आने वाले समय में कार्य की जानी हो या प्रकट की जानी हो, उसे भविष्य काल कहते हैं।

भविष्य काल के वाक्य जैसे:-

  • वह कल घर जाएगा।
  • हम सर्कस देखने जायेंगे।
  • किसान खेत में बीज बोयेगा।

उपरोक्त वाक्यों की क्रियाओं से पता चलता है कि ये सभी कार्य आने वाले समय में पूरे होंगे।  तो ये भविष्य काल की क्रिया हैं।

भविष्य काल की पहचान क्या है

भविष्य काल की पहचान करने के लिए वाक्य के अंत में 'गा, गी, गे' आदि आते हैं।


भविष्य काल के भेद | bhavishya kal ke kitne bhed hote hain

भविष्यतकाल के तीन भेद होते है, जो निम्नलिखित हैं।

  1. सामान्य भविष्यत काल
  2. सम्भाव्य भविष्यत काल
  3. हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल


(i) सामान्य भविष्यत काल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से यह पता चलता है कि वह भविष्य में सामान्य रूप से घटित होगा, सरल भविष्य काल कहलाता है।  इससे पता चलता है कि यह क्रिया सामान्यतः भविष्य में होगी।

जैसे :-

  • बच्चे कैरमबोर्ड खेलेंगे।
  • वह घर जायेगा।
  • दीपक अख़बार बेचेगा।
उपरोक्त वाक्यों में, क्रिया सामान्य रूप से भविष्य के बारे में जानकारी दे रही है।  तो ये सरल भविष्य काल क्रिया हैं।


(ii) सम्भाव्य भविष्यत काल की परिभाषा

क्रिया के जिस रूप से उसके भविष्य में होने की संभावना का पता चलता है, उसे सम्भाव्य भविष्यत काल कहते हैं। जिससे भविष्य में किसी कार्य के होने की सम्भावना हो।

जैसे :-

  • शायद चोर पकड़ा जाए।
  • परीक्षा में शायद मुझे अच्छे अंक प्राप्त हों।


उपरोक्त वाक्यों में क्रिया भविष्य में होने की संभावना है।  यह पूर्ण होगा, यह निश्चित नहीं है।  तो ये संभावित भविष्य काल की क्रिया हैं।


(iii) हेतुहेतुमद्भविष्य भविष्यत काल की परिभाषा

इसमे एक क्रिया का होना दूसरी क्रिया के होने पर निर्भर करता है।

जैसे:-

  • वह आये तो मै जाऊ।
  • वह कमाये तो मैं खाऊँ।


काल से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न [FAQ]

Q. काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. काल के तीन भेद होते हैं।

Q. भूतकाल कितने प्रकार के होते हैं?
Ans. भूतकाल के छः भेद होते हैं।

Q. भविष्य काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. भविष्य काल के तीन भेद होते हैं।

Q. वर्तमान काल के कितने भेद होते हैं?
Ans. वर्तमान काल के पाँच भेद होते हैं।
View Details
Notification
This is just an example, you can fill it later with your own note.
Done