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अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा- हेल्लो दोस्तों! Welcome to hindi OS. पिछले आर्टिकल में हमने मुहावरे का अर्थ तथा विशेषता के बारे में जान चुके है इसलिए इस आर्मेंटिकल में वर्ड के अनुसार अ से औ तक के वर्ण से बनने वाले मुहावरे को पढ़ेंगे


अ से औ तक वर्ण क्रमानुसार मुहावरे

अ से बनने वाले मुहावरे 

यहाँ पर मुहावरे  उसके बाद अर्थ फिर वाक्य प्रयोग क्रम से दिया गया है

  • अंधे की लकड़ी – (एकमात्र सहारा) – मानव अपने माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी है ।

  • अक्ल पर पत्थर पड़ना – (बुद्धि नष्ट होना) – मुसीबत आने पर मनुष्य की अक्ल पर पत्थर पड़ जाते हैं ।

  • अपना उल्लू सीधा करना – (अपना स्वार्थ पूरा करना) – अरुण को तो अपना उल्लू सीधा करना था , अब वह तुषार से बात भी नहीं करता ।

  • अपना सा मुंह लेकर रह जाना – (असफलता प्राप्त होना) – जब वह अपना काम पूरा ना कर सका तो मालिक के समने वह अपना सा मुंह लेकर रह गया ।


  • अरमान निकालना – (इच्छा पूरी करना) – बेटे की शादी में बाबु साहब ने अपने दिल के अरमान निकाले ।

  • अरमान रहना – (इच्छा पूरी न होना) – पुत्र के मर जाने से गरीब के सारे अरमान रह गये 

  • अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनना – (स्वं अपनी प्रशंसा करना) – अच्छे आदमियों को अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनाना शोभा नहीं देता ।

  • अक्ल का चरने जाना – (समझ का आभाव होना) – इतना भी समझ नहीं सके , क्या अक्ल चरने गई है ।

  • अपने पैरों पर खड़ा होना – (आत्मनिर्भर होना) – व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़े होकर काम करना चाहिए ।

  • अंगूठा दिखाना – (समय पर धोका देना) – मैंने सचिन से कुछ पैसे मांगे तो उसने मुझे अंगूठा दिखा दिया ।

  • अक्ल का अँधा – (मूर्ख) – राज अक्ल का अँधा है , वह किसी के समझाने से मानता ही नहीं है ।


  • अंक भरना – (प्यार से गले लगा लेना) – माँ ने बेटी को देखते ही अंक भर लिया ।

  • अंग टूटना – (बहुत थक जाना) – ज्यादा काम करने से मेरे तो अंग टूटने लगे हैं ।

  • अंगारों पर लेटना – (दुःख सहना) – वह दूसरे की तरक्की देखकर अंगारों पर लोटने लगा ।
  • अपना राग अलापना – (अपनी ही बातें करते रहना) – मैं उससे मदद मांगने गया था , परन्तु वह अपना ही राग अलापता रहा ।

  • अँधेरे घर का उजियारा – (इकलौता पुत्र) – राम इसलिए अधिक लाडला पुत्र है क्योंकि वही इस अँधेरे घर का उजियारा है ।

  • अक्ल का दुश्मन – (मूर्ख) – अरे! अक्ल के दुश्मन , यदि जीवन में सफलता पानी है तो मेहनत करो ।

  • अक्ल की दुम – (खुद को होशियार समझनेवाला) – तुम्हे दस का पहाडा तो आता है नहीं और खुद को साइंस का टॉपर कहते हो ।

  • अंचरा पसारना – (माँगना) – माँ ने अपने बेटे की तरक्की के लिए भगवान के सामने अंचरा पसार लिया ।

  • अण्टी मारना – (चाल चलना) – ऐसी अण्टीमारो कि सब चारों खाने चित हो जाए ।

  • अण्ड-बण्ड कहना – (भला-बुरा कहना) – तुम क्या अण्ड-बण्ड ख रहे हो कोई सुन लेगा तो बहुत पिटेगा ।

  • अन्धाधुन्ध लुटाना – (बिना सोचे खर्च करना) – अपनी कमाई को कोई भी अन्धाधुन्ध लुटाया नहीं करते ।

  • अन्धा बनना – (आगे-पीछे कुछ नहीं देखना) – धर्म के पीछे अँधा नहीं बनना चाहिए ।

  • अढाई दिन की हुकुमत -( कुछ ही दिन की शानोशौकत) – जरा होशियार रहें ये अढाई दिन की हुकुमत है जल्दी चली जाएगी ।

  • अन्न जल उठाना – (मरना) – मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा यहाँ से अन्न जल उठ गया है ।

  • अन्न जल करना – (जलपान करना) – बहुत दिनों बाद आये हो कुछ अन्न जल तो कर लेते ।

  • अन्न लगना – (स्वस्थ रहना) – उसे तो अपने गाँव का ही अन्न लगता है ।

  • अपना किया पाना – (कर्म का फल भोगना ) – जब बेकार लोगों से नाता रखोगे तो अपना किया ही पाओगे ।
  • अन्धा बनाना – (धोखा देना) – लोगों ने ही लोगों को अँधा बना रखा है ।

  • अँधा होना – (विवेकभ्रष्ट होना) – तुम अंधे हो गये हो क्या यह भी नहीं देखते कि कोई खड़ा है या नहीं ।

  • अंधेरखाता – (अन्याय होना) – मुंहमांगा देने पर भी लोग अन्याय करते हैं यह कैसा अन्धेरखाता है ।

  • अंधेर नगरी – (जहाँ कपट का बोलबाला हो) – पहले चाय इकन्नी में मिलती थी और अब दस पैसे की मिलती है ये बाजार नहीं अंधेर नगरी है ।

  • अकेला दम – (अकेला होना) – मैं तो अकेला हूँ जिधर सींग समायेगा , चल दूंगा ।

  • अगले जमाने का आदमी – (ईमानदार व्यक्ति) – आज की दुनिया में अगले जमाने का आदमी बुद्ध माना जाता है ।

  • अब तब करना – (बहाना बनाना) – मैने उससे कुछ माँगा तो उसने अब तब करना शुरू क्र दिया ।

  • अब तब होना – (परेशान करना) – दवाई देने से कोई फायदा नहीं वह तो अब तब हो रहा है ।

आ से बनने वाले मुहावरे 

  • आँखों पर चढना – (कुछ पसंद आ जाना) – तुम्हारी घड़ी चोर की आँखों पर चढ़ गई इसलिए उसने चुरा ली ।

  • आँखों में पानी न होना – (बेशर्म होना) – बेईमान लोगों की आँखों में पानी नहीं होता ।

  • आँखों में खून उतरना – (अत्यधिक क्रोधित होना) – विजय को देखते ही धर्मराज की आँखों में खून उतर आया ।
  • आँखें सेकना – (दूसरों की लड़ाई से आनन्द लेना) – हमारी लड़ाई को देखकर सभी लोग अपनी आँखें सेकते हैं ।


  • आँख उठाकर न देखना – (ध्यान न देना) – श्याम किसी को आंख उठाकर नहीं देखता है ।

  • आँख का कांटा होना – (शत्रु होना) – बुरा काम करने की वजह से वह आस-पडोस वालों की आँख का कांटा हो गया है ।

  • आँख का काजल चुराना – (सफाई के साथ काम करना) – बहुत सारे लोगों के बीच से घडी का चोरी होना ऐसा लगता है जैसे चोर ने आँखों से काजल चुरा लिया ।

  • आँखों में गड़ना – (बुरा लगना) – मेरी बातें उसकी आँखों में गड़ गई ।

  • आँखों में चर्बी छाना – (घमंड होना) – जिसके पास दौलत होती है उसकी आँखों में चर्बी छा जाती है ।

  • आँखें लाल करना – (गुस्से से देखना) – सुंदर की बातों का बुरा मान क्र उसने आँखें लाल कर लीं ।

  • आवाज उठाना – (विरोध करना ) – गुंडों के खिलाफ आवाज उठाना आम बात नहीं है ।
  • आग लगने पर कुआँ खोदना – (मुसीबत आने पर मुसीबत का हल ढूँढना) – अंतिम घडी में शहर से डॉक्टर बुलाना आग लगने पर कुआँ खोदने के समान है ।

  • आटा गीला करना – (घाटा आना) – कम कीमत में फसल बेचोगे तो आटा तो गीला होगा ही ।

  • आधा तीतर आधा बटेर – (बेढंगा) – पश्चिमी संस्क्रती ने भारतीय संस्क्रती को आधा तीतर आधा बटेर बना दिया ।

  • आबरू पर पानी फिरना – (प्रतिष्ठा बर्बाद होना) – तुम्हारी नादानी के कारण ही हमारी आबरू पर पानी फिर गया ।

  • आँच न आने देना – (थोड़ी सी भी चोट न लगने देना) – मेरा दोस्त मुझ पर जरा भी आँच नहीं आने देगा ।

  • आटे दाल का भाव मालूम होना – (कठिन समय की समझ होना) – जब जिम्मेदारियाँ निभाने लगोगे तब तुम्हे आटे दाल का भाव पता लगेगा ।

  • आँसू पीकर रह जाना – (दुःख और अपमान को सहन करना) – सबके समने बुरा भला सुनकर भी वह आँसू पीकर रह गया ।

  • आग पर पानी डालना – ( शांत करना) – ओ भाइयों में ज्यादा गरमा-गर्मी हो गई थी लेकिन दीदी की बातों ने आग पर पानी डाल दिया ।

  • आग में कूदना – (जानबूझकर मुसीबत में पड़ना) – वीर पुरुष किसी खतरे से नहीं डरते वे तो आग में भी कूद पड़ते हैं ।

  • आसमान सिर पर उठाना – (शोर मचाना) – स्कूल के बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया ।

  • आँख भर आना – (आँसू आना) – बेटी की बिदाई से माँ बाप की आँख भर आई ।

  • आँखों में बसना – (दिल में समाना) – वह इतना बुद्धिमान है कि वह मेरी आँखों में बस गया ।

इ से बनने वाले मुहावरे 

  • इंद्र की परी - (बहुत सुन्दर स्त्री)- राधा तो इंद्र की परी हैं, वह तो विश्व सुन्दरी बनेगी।

  • इज्जत उतारना - (अपमानित करना)- जब चीनी लेकर पैसे नहीं दिए तो दुकानदार ने ग्राहक की इज्जत उतार दी।

  • इज्जत मिट्टी में मिलाना -(प्रतिष्ठा या सम्मान नष्ट करना) - रामू की शराब की आदत ने उसके परिवार की इज्जत मिट्टी में मिला दी हैं।

  • इधर-उधर की लगाना या इधर की उधर लगाना -(चुगली करना) - मित्र, इधर-उधर की लगाना छोड़ दो, बुरी बात हैं।

  • इधर-उधर की हाँकना -(बेकार की बातें करना या गप मारना)- वह हमेशा इधर-उधर की हाँकता रहता हैं, कभी बैठकर पढ़ता नहीं।

  • इस कान सुनना, उस कान निकालना -(ध्यान न देना)- उसकी बेकार की बातों को तो मैं इस कान सुनता हूँ, उस कान निकाल देता हूँ।

  • इस हाथ देना, उस हाथ लेना -(तुरन्त फल मिलना)- रामदीन तो इस हाथ दे, उस हाथ ले में विश्वास करता हैं।

  • इंद्र का अखाड़ा -(किसी सजी हुई सभा में खूब नाच-रंग होता है)- पहले जमाने में राजा-महाराजाओं के यहाँ इंद्र का अखाड़ा सजता था और आजकल दागी नेताओं के यहाँ।

  • इंतकाल होना -(मर जाना)- पिता के इंतकाल के बाद सारे घर की जिम्मेदारी अब फारुख के कंधों पर ही है।

  • इशारे पर नाचना -(वश में हो जाना)- जो व्यक्ति अपनी पत्नी के इशारे पर नाचता है वह अपने माँ-बाप की कहाँ सुनेगा।
  • (ई)

  • ईंट से ईंट बजाना -(युद्धात्मक विनाश लाना)- शुरू में तो हिटलर ने यूरोप में ईट-से-ईट बजा छोड़ी, मगर बाद में खुद उसकी ईंटे बजनी लगी।

  • ईंट का जबाब पत्थर से देना -(जबरदस्त बदला लेना)- भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा।

  • ईद का चाँद होना -(बहुत दिनों बाद दिखाई देना)- तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते, तुम्हे देखने को तरस गया, ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो।

  • ईमान बेचना - (बेईमानी करना)- मित्र, ईमान बेचने से कुछ नहीं होगा, परिश्रम करके खाओ।

उ से बनने वाले मुहावरे 

  • उड़ती चिड़िया को पहचानना - (मन की या रहस्य की बात तुरंत जानना)- कोई मुझे धोखा नही दे सकता। मै उड़ती चिड़िया पहचान लेता हुँ।

  • उन्नीस बीस का अंतर होना - (थोड़ा-सा अन्तर)- रामू और मोहन की सूरत में बस उन्नीस-बीस का अन्तर हैं।

  • उलटी गंगा बहाना - (अनहोनी या लीक से हटकर बात करना)- अमित हमेशा उल्टी गंगा बहाता हैं - कह रहा था कि वह हाथों के बल चलकर स्कूल जाएगा।

  • उँगली उठाना -(बदनाम करना या दोषारोपण करना)- किसी पर खाहमखाह उँगली उठाना गलत हैं।

  • उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ना -(थोड़ा-सा सहारा या मदद पाकर ज्यादा की कोशिश करना)- उस भिखारी को मैंने एक रुपया दे दिया तो वह पाँच रुपए और माँगने लगा। तब मैंने उससे कहा - अरे भाई, तुम तो उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ रहे हो।

  • उड़ जाना -(खर्च हो जाना)- vअरे मित्र, महीना पूरा होने से पहले ही सारा वेतन उड़ जाता हैं।

  • उड़ती खबर -(अफवाह)- मित्र, ये तो उड़ती खबर हैं। प्रधानमंत्री को कुछ नहीं हुआ।

  • उड़न-छू हो जाना -(गायब हो जाना)- जो भी हाथ लगा, चोर वही लेकर उड़न-छूहो गया।

  • उधेड़बुन में पड़ना या रहना -(फिक्र या चिन्ता करना)- राम को जब देखो, पैसों की उधेड़बुन में लगा रहता हैं।

  • उबल पड़ना -(एकाएक क्रोधित होना)- दादी माँ से सब बच्चे डरते हैं, पता नहीं वे कब उबल पड़ें।

  • उलटी माला फेरना -(बुराई या अनिष्ट चाहना)- जब आयुष को रमेश ने चाँटा मारा तो वह उल्टी माला फेरने लगा।


  • उलटी-सीधी जड़ना -(झूठी शिकायत करना)- उल्टी-सीधी जड़ना तो माया की आदत हैं।

  • उलटी-सीधी सुनाना -(डाँटना-फटकारना)- जब माला ने दादी का कहना नहीं माना तो वे उसे उल्टी-सीधी सुनाने लगीं।

  • उलटे छुरे से मूँड़ना -(ठगना)- प्रयाग में पण्डे और रिक्शा वाले गरीब ग्रामीणों को उल्टे छुरे से मूँड़ देते हैं।

  • उलटे पाँव लौटना -(बिना रुके, तुरंत वापस लौट जाना)- मनीष के घर पर ताला लगा था इसलिए मैं उलटे पाँव लौट आया।

  • उल्लू बनाना -(बेवकूफ बनाना)- कल एक साधु, ममता को उल्लू बनाकर उससे रुपए ले गया।

  • उल्लू सीधा करना -(अपना स्वार्थ सिद्ध करना)- मुझे ज्ञात हैं, तुम यहाँ अपना उल्लू सीधा करने आए हो।

  • उँगलियों पर नचाना -(वश में करना)- इब्राहीम की पत्नी तो उसे अपनी उँगलियों पर नचाती है।

  • उगल देना -(भेद प्रकट कर देना)- जब पुलिस के डंडे पड़े तो उस चोर ने सब कुछ सच-सच उगल दिया।

  • उठ जाना -(मर जाना)- जो भले लोग होते हैं उनके उठ जाने के बाद भी दुनिया उन्हें याद करती है।

  • उलटे मुँह गिरना -(दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में स्वयं नीचा देखना)- दूसरों को धोखा मत दो। किसी दिन सेर को सवा सेर मिल गया तो उलटे मुँह गिरोगे।

  • उल्लू बोलना -(वीरान स्थान होना)- जब पुलिस उस घर में घुसी तो वहाँ कोई नहीं था, उल्लू बोल रहे थे।

  • उल्लू का पट्ठा -(निपट मूर्ख)- उस उल्लू के पट्ठे को इतना समझाया कि दूसरों से पंगा न ले लेकिन उस समय उसने मेरी एक न सुनी। अब जब उलटे मुँह गिरा तो अक्ल आई।

ऊ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ना – (थोड़े की जगह पूरा लेने की इच्छा रखना) – मोहन से सावधान रहो वह तो ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ने वाला आदमी है ।

  • ऊँट के मुंह में जीरा – (आवश्यकता से कम वस्तु) – रत दिन मेहनत करने वाले मजदूर के लिए दो रोटियां ऊँट के मुंह में जीरे के समान हैं ।

  • ऊँगली पर नचाना – (अपने वश में कर लेना) – वह कमा कर देता है , इसलिए वह सारे घर को ऊँगली पर नचाता है ।

  • ऊँची दुकान फीका पकवान – (उपरी दिखावा करना) – वैसे तो दुकान इतनी बड़ी है और पकवान बिलकुल फीका यह तो वही बात हुई कि ऊँची दुकान फीका पकवान वाली बात हुई ।

ए से बनने वाले मुहावरे 

  • एक-एक ग्यारह होना – (एकता होना) – पहले वो अलग अलग रहते थे तो लोग उन्हें स्टेट थे लेकिन अब वो एक-एक ग्यारह हो गये हैं अब लोग उनसे डरने लगे हैं ।

  • एक टांग पर खड़ा होना- (काम के लिए तैयार रहना) – जब तक बहन की शादी नहीं हुई वह एक टांग पर खड़ा रहा ।

  • एक लाठी से हाँकना – (सबके साथ एक जैसा व्यवहार करना) – सब लोगों को एक लाठी से हाँकना कोई बुद्धिमानी नहीं है ।

  • एक हाथ से ताली न बजना – (दूसरे के बिना काम न होना) – कभी भी एक हाथ से ताली नहीं बजती गलती तुम दोनों की है ।

ऐ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऐसी तैसी करना – (बेईज्जती करना) – सब के समने उसने अपने ही बड़े भाई की ऐसी तैसी कर दी।

 उम्मीद करता हूं कि आप अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा समझ गए होंगे और यह लेख आपको अच्छा लगा होगा



अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा- हेल्लो दोस्तों! Welcome to hindi OS. पिछले आर्टिकल में हमने मुहावरे का अर्थ तथा विशेषता के बारे में जान चुके है इसलिए इस आर्मेंटिकल में वर्ड के अनुसार अ से औ तक के वर्ण से बनने वाले मुहावरे को पढ़ेंगे


अ से औ तक वर्ण क्रमानुसार मुहावरे

अ से बनने वाले मुहावरे 

यहाँ पर मुहावरे  उसके बाद अर्थ फिर वाक्य प्रयोग क्रम से दिया गया है

  • अंधे की लकड़ी – (एकमात्र सहारा) – मानव अपने माता-पिता के लिए अंधे की लकड़ी है ।

  • अक्ल पर पत्थर पड़ना – (बुद्धि नष्ट होना) – मुसीबत आने पर मनुष्य की अक्ल पर पत्थर पड़ जाते हैं ।

  • अपना उल्लू सीधा करना – (अपना स्वार्थ पूरा करना) – अरुण को तो अपना उल्लू सीधा करना था , अब वह तुषार से बात भी नहीं करता ।

  • अपना सा मुंह लेकर रह जाना – (असफलता प्राप्त होना) – जब वह अपना काम पूरा ना कर सका तो मालिक के समने वह अपना सा मुंह लेकर रह गया ।


  • अरमान निकालना – (इच्छा पूरी करना) – बेटे की शादी में बाबु साहब ने अपने दिल के अरमान निकाले ।

  • अरमान रहना – (इच्छा पूरी न होना) – पुत्र के मर जाने से गरीब के सारे अरमान रह गये 

  • अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनना – (स्वं अपनी प्रशंसा करना) – अच्छे आदमियों को अपने मुंह मियाँ मिट्ठू बनाना शोभा नहीं देता ।

  • अक्ल का चरने जाना – (समझ का आभाव होना) – इतना भी समझ नहीं सके , क्या अक्ल चरने गई है ।

  • अपने पैरों पर खड़ा होना – (आत्मनिर्भर होना) – व्यक्ति को अपने पैरों पर खड़े होकर काम करना चाहिए ।

  • अंगूठा दिखाना – (समय पर धोका देना) – मैंने सचिन से कुछ पैसे मांगे तो उसने मुझे अंगूठा दिखा दिया ।

  • अक्ल का अँधा – (मूर्ख) – राज अक्ल का अँधा है , वह किसी के समझाने से मानता ही नहीं है ।


  • अंक भरना – (प्यार से गले लगा लेना) – माँ ने बेटी को देखते ही अंक भर लिया ।

  • अंग टूटना – (बहुत थक जाना) – ज्यादा काम करने से मेरे तो अंग टूटने लगे हैं ।

  • अंगारों पर लेटना – (दुःख सहना) – वह दूसरे की तरक्की देखकर अंगारों पर लोटने लगा ।
  • अपना राग अलापना – (अपनी ही बातें करते रहना) – मैं उससे मदद मांगने गया था , परन्तु वह अपना ही राग अलापता रहा ।

  • अँधेरे घर का उजियारा – (इकलौता पुत्र) – राम इसलिए अधिक लाडला पुत्र है क्योंकि वही इस अँधेरे घर का उजियारा है ।

  • अक्ल का दुश्मन – (मूर्ख) – अरे! अक्ल के दुश्मन , यदि जीवन में सफलता पानी है तो मेहनत करो ।

  • अक्ल की दुम – (खुद को होशियार समझनेवाला) – तुम्हे दस का पहाडा तो आता है नहीं और खुद को साइंस का टॉपर कहते हो ।

  • अंचरा पसारना – (माँगना) – माँ ने अपने बेटे की तरक्की के लिए भगवान के सामने अंचरा पसार लिया ।

  • अण्टी मारना – (चाल चलना) – ऐसी अण्टीमारो कि सब चारों खाने चित हो जाए ।

  • अण्ड-बण्ड कहना – (भला-बुरा कहना) – तुम क्या अण्ड-बण्ड ख रहे हो कोई सुन लेगा तो बहुत पिटेगा ।

  • अन्धाधुन्ध लुटाना – (बिना सोचे खर्च करना) – अपनी कमाई को कोई भी अन्धाधुन्ध लुटाया नहीं करते ।

  • अन्धा बनना – (आगे-पीछे कुछ नहीं देखना) – धर्म के पीछे अँधा नहीं बनना चाहिए ।

  • अढाई दिन की हुकुमत -( कुछ ही दिन की शानोशौकत) – जरा होशियार रहें ये अढाई दिन की हुकुमत है जल्दी चली जाएगी ।

  • अन्न जल उठाना – (मरना) – मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा यहाँ से अन्न जल उठ गया है ।

  • अन्न जल करना – (जलपान करना) – बहुत दिनों बाद आये हो कुछ अन्न जल तो कर लेते ।

  • अन्न लगना – (स्वस्थ रहना) – उसे तो अपने गाँव का ही अन्न लगता है ।

  • अपना किया पाना – (कर्म का फल भोगना ) – जब बेकार लोगों से नाता रखोगे तो अपना किया ही पाओगे ।
  • अन्धा बनाना – (धोखा देना) – लोगों ने ही लोगों को अँधा बना रखा है ।

  • अँधा होना – (विवेकभ्रष्ट होना) – तुम अंधे हो गये हो क्या यह भी नहीं देखते कि कोई खड़ा है या नहीं ।

  • अंधेरखाता – (अन्याय होना) – मुंहमांगा देने पर भी लोग अन्याय करते हैं यह कैसा अन्धेरखाता है ।

  • अंधेर नगरी – (जहाँ कपट का बोलबाला हो) – पहले चाय इकन्नी में मिलती थी और अब दस पैसे की मिलती है ये बाजार नहीं अंधेर नगरी है ।

  • अकेला दम – (अकेला होना) – मैं तो अकेला हूँ जिधर सींग समायेगा , चल दूंगा ।

  • अगले जमाने का आदमी – (ईमानदार व्यक्ति) – आज की दुनिया में अगले जमाने का आदमी बुद्ध माना जाता है ।

  • अब तब करना – (बहाना बनाना) – मैने उससे कुछ माँगा तो उसने अब तब करना शुरू क्र दिया ।

  • अब तब होना – (परेशान करना) – दवाई देने से कोई फायदा नहीं वह तो अब तब हो रहा है ।

आ से बनने वाले मुहावरे 

  • आँखों पर चढना – (कुछ पसंद आ जाना) – तुम्हारी घड़ी चोर की आँखों पर चढ़ गई इसलिए उसने चुरा ली ।

  • आँखों में पानी न होना – (बेशर्म होना) – बेईमान लोगों की आँखों में पानी नहीं होता ।

  • आँखों में खून उतरना – (अत्यधिक क्रोधित होना) – विजय को देखते ही धर्मराज की आँखों में खून उतर आया ।
  • आँखें सेकना – (दूसरों की लड़ाई से आनन्द लेना) – हमारी लड़ाई को देखकर सभी लोग अपनी आँखें सेकते हैं ।


  • आँख उठाकर न देखना – (ध्यान न देना) – श्याम किसी को आंख उठाकर नहीं देखता है ।

  • आँख का कांटा होना – (शत्रु होना) – बुरा काम करने की वजह से वह आस-पडोस वालों की आँख का कांटा हो गया है ।

  • आँख का काजल चुराना – (सफाई के साथ काम करना) – बहुत सारे लोगों के बीच से घडी का चोरी होना ऐसा लगता है जैसे चोर ने आँखों से काजल चुरा लिया ।

  • आँखों में गड़ना – (बुरा लगना) – मेरी बातें उसकी आँखों में गड़ गई ।

  • आँखों में चर्बी छाना – (घमंड होना) – जिसके पास दौलत होती है उसकी आँखों में चर्बी छा जाती है ।

  • आँखें लाल करना – (गुस्से से देखना) – सुंदर की बातों का बुरा मान क्र उसने आँखें लाल कर लीं ।

  • आवाज उठाना – (विरोध करना ) – गुंडों के खिलाफ आवाज उठाना आम बात नहीं है ।
  • आग लगने पर कुआँ खोदना – (मुसीबत आने पर मुसीबत का हल ढूँढना) – अंतिम घडी में शहर से डॉक्टर बुलाना आग लगने पर कुआँ खोदने के समान है ।

  • आटा गीला करना – (घाटा आना) – कम कीमत में फसल बेचोगे तो आटा तो गीला होगा ही ।

  • आधा तीतर आधा बटेर – (बेढंगा) – पश्चिमी संस्क्रती ने भारतीय संस्क्रती को आधा तीतर आधा बटेर बना दिया ।

  • आबरू पर पानी फिरना – (प्रतिष्ठा बर्बाद होना) – तुम्हारी नादानी के कारण ही हमारी आबरू पर पानी फिर गया ।

  • आँच न आने देना – (थोड़ी सी भी चोट न लगने देना) – मेरा दोस्त मुझ पर जरा भी आँच नहीं आने देगा ।

  • आटे दाल का भाव मालूम होना – (कठिन समय की समझ होना) – जब जिम्मेदारियाँ निभाने लगोगे तब तुम्हे आटे दाल का भाव पता लगेगा ।

  • आँसू पीकर रह जाना – (दुःख और अपमान को सहन करना) – सबके समने बुरा भला सुनकर भी वह आँसू पीकर रह गया ।

  • आग पर पानी डालना – ( शांत करना) – ओ भाइयों में ज्यादा गरमा-गर्मी हो गई थी लेकिन दीदी की बातों ने आग पर पानी डाल दिया ।

  • आग में कूदना – (जानबूझकर मुसीबत में पड़ना) – वीर पुरुष किसी खतरे से नहीं डरते वे तो आग में भी कूद पड़ते हैं ।

  • आसमान सिर पर उठाना – (शोर मचाना) – स्कूल के बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया ।

  • आँख भर आना – (आँसू आना) – बेटी की बिदाई से माँ बाप की आँख भर आई ।

  • आँखों में बसना – (दिल में समाना) – वह इतना बुद्धिमान है कि वह मेरी आँखों में बस गया ।

इ से बनने वाले मुहावरे 

  • इंद्र की परी - (बहुत सुन्दर स्त्री)- राधा तो इंद्र की परी हैं, वह तो विश्व सुन्दरी बनेगी।

  • इज्जत उतारना - (अपमानित करना)- जब चीनी लेकर पैसे नहीं दिए तो दुकानदार ने ग्राहक की इज्जत उतार दी।

  • इज्जत मिट्टी में मिलाना -(प्रतिष्ठा या सम्मान नष्ट करना) - रामू की शराब की आदत ने उसके परिवार की इज्जत मिट्टी में मिला दी हैं।

  • इधर-उधर की लगाना या इधर की उधर लगाना -(चुगली करना) - मित्र, इधर-उधर की लगाना छोड़ दो, बुरी बात हैं।

  • इधर-उधर की हाँकना -(बेकार की बातें करना या गप मारना)- वह हमेशा इधर-उधर की हाँकता रहता हैं, कभी बैठकर पढ़ता नहीं।

  • इस कान सुनना, उस कान निकालना -(ध्यान न देना)- उसकी बेकार की बातों को तो मैं इस कान सुनता हूँ, उस कान निकाल देता हूँ।

  • इस हाथ देना, उस हाथ लेना -(तुरन्त फल मिलना)- रामदीन तो इस हाथ दे, उस हाथ ले में विश्वास करता हैं।

  • इंद्र का अखाड़ा -(किसी सजी हुई सभा में खूब नाच-रंग होता है)- पहले जमाने में राजा-महाराजाओं के यहाँ इंद्र का अखाड़ा सजता था और आजकल दागी नेताओं के यहाँ।

  • इंतकाल होना -(मर जाना)- पिता के इंतकाल के बाद सारे घर की जिम्मेदारी अब फारुख के कंधों पर ही है।

  • इशारे पर नाचना -(वश में हो जाना)- जो व्यक्ति अपनी पत्नी के इशारे पर नाचता है वह अपने माँ-बाप की कहाँ सुनेगा।
  • (ई)

  • ईंट से ईंट बजाना -(युद्धात्मक विनाश लाना)- शुरू में तो हिटलर ने यूरोप में ईट-से-ईट बजा छोड़ी, मगर बाद में खुद उसकी ईंटे बजनी लगी।

  • ईंट का जबाब पत्थर से देना -(जबरदस्त बदला लेना)- भारत अपने दुश्मनों को ईंट का जबाब पत्थर से देगा।

  • ईद का चाँद होना -(बहुत दिनों बाद दिखाई देना)- तुम तो कभी दिखाई ही नहीं देते, तुम्हे देखने को तरस गया, ऐसा लगता है कि तुम ईद के चाँद हो गए हो।

  • ईमान बेचना - (बेईमानी करना)- मित्र, ईमान बेचने से कुछ नहीं होगा, परिश्रम करके खाओ।

उ से बनने वाले मुहावरे 

  • उड़ती चिड़िया को पहचानना - (मन की या रहस्य की बात तुरंत जानना)- कोई मुझे धोखा नही दे सकता। मै उड़ती चिड़िया पहचान लेता हुँ।

  • उन्नीस बीस का अंतर होना - (थोड़ा-सा अन्तर)- रामू और मोहन की सूरत में बस उन्नीस-बीस का अन्तर हैं।

  • उलटी गंगा बहाना - (अनहोनी या लीक से हटकर बात करना)- अमित हमेशा उल्टी गंगा बहाता हैं - कह रहा था कि वह हाथों के बल चलकर स्कूल जाएगा।

  • उँगली उठाना -(बदनाम करना या दोषारोपण करना)- किसी पर खाहमखाह उँगली उठाना गलत हैं।

  • उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ना -(थोड़ा-सा सहारा या मदद पाकर ज्यादा की कोशिश करना)- उस भिखारी को मैंने एक रुपया दे दिया तो वह पाँच रुपए और माँगने लगा। तब मैंने उससे कहा - अरे भाई, तुम तो उँगली पकड़कर पौंहचा पकड़ रहे हो।

  • उड़ जाना -(खर्च हो जाना)- vअरे मित्र, महीना पूरा होने से पहले ही सारा वेतन उड़ जाता हैं।

  • उड़ती खबर -(अफवाह)- मित्र, ये तो उड़ती खबर हैं। प्रधानमंत्री को कुछ नहीं हुआ।

  • उड़न-छू हो जाना -(गायब हो जाना)- जो भी हाथ लगा, चोर वही लेकर उड़न-छूहो गया।

  • उधेड़बुन में पड़ना या रहना -(फिक्र या चिन्ता करना)- राम को जब देखो, पैसों की उधेड़बुन में लगा रहता हैं।

  • उबल पड़ना -(एकाएक क्रोधित होना)- दादी माँ से सब बच्चे डरते हैं, पता नहीं वे कब उबल पड़ें।

  • उलटी माला फेरना -(बुराई या अनिष्ट चाहना)- जब आयुष को रमेश ने चाँटा मारा तो वह उल्टी माला फेरने लगा।


  • उलटी-सीधी जड़ना -(झूठी शिकायत करना)- उल्टी-सीधी जड़ना तो माया की आदत हैं।

  • उलटी-सीधी सुनाना -(डाँटना-फटकारना)- जब माला ने दादी का कहना नहीं माना तो वे उसे उल्टी-सीधी सुनाने लगीं।

  • उलटे छुरे से मूँड़ना -(ठगना)- प्रयाग में पण्डे और रिक्शा वाले गरीब ग्रामीणों को उल्टे छुरे से मूँड़ देते हैं।

  • उलटे पाँव लौटना -(बिना रुके, तुरंत वापस लौट जाना)- मनीष के घर पर ताला लगा था इसलिए मैं उलटे पाँव लौट आया।

  • उल्लू बनाना -(बेवकूफ बनाना)- कल एक साधु, ममता को उल्लू बनाकर उससे रुपए ले गया।

  • उल्लू सीधा करना -(अपना स्वार्थ सिद्ध करना)- मुझे ज्ञात हैं, तुम यहाँ अपना उल्लू सीधा करने आए हो।

  • उँगलियों पर नचाना -(वश में करना)- इब्राहीम की पत्नी तो उसे अपनी उँगलियों पर नचाती है।

  • उगल देना -(भेद प्रकट कर देना)- जब पुलिस के डंडे पड़े तो उस चोर ने सब कुछ सच-सच उगल दिया।

  • उठ जाना -(मर जाना)- जो भले लोग होते हैं उनके उठ जाने के बाद भी दुनिया उन्हें याद करती है।

  • उलटे मुँह गिरना -(दूसरे को नीचा दिखाने के प्रयास में स्वयं नीचा देखना)- दूसरों को धोखा मत दो। किसी दिन सेर को सवा सेर मिल गया तो उलटे मुँह गिरोगे।

  • उल्लू बोलना -(वीरान स्थान होना)- जब पुलिस उस घर में घुसी तो वहाँ कोई नहीं था, उल्लू बोल रहे थे।

  • उल्लू का पट्ठा -(निपट मूर्ख)- उस उल्लू के पट्ठे को इतना समझाया कि दूसरों से पंगा न ले लेकिन उस समय उसने मेरी एक न सुनी। अब जब उलटे मुँह गिरा तो अक्ल आई।

ऊ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ना – (थोड़े की जगह पूरा लेने की इच्छा रखना) – मोहन से सावधान रहो वह तो ऊँगली पकडकर पहुँचा पकड़ने वाला आदमी है ।

  • ऊँट के मुंह में जीरा – (आवश्यकता से कम वस्तु) – रत दिन मेहनत करने वाले मजदूर के लिए दो रोटियां ऊँट के मुंह में जीरे के समान हैं ।

  • ऊँगली पर नचाना – (अपने वश में कर लेना) – वह कमा कर देता है , इसलिए वह सारे घर को ऊँगली पर नचाता है ।

  • ऊँची दुकान फीका पकवान – (उपरी दिखावा करना) – वैसे तो दुकान इतनी बड़ी है और पकवान बिलकुल फीका यह तो वही बात हुई कि ऊँची दुकान फीका पकवान वाली बात हुई ।

ए से बनने वाले मुहावरे 

  • एक-एक ग्यारह होना – (एकता होना) – पहले वो अलग अलग रहते थे तो लोग उन्हें स्टेट थे लेकिन अब वो एक-एक ग्यारह हो गये हैं अब लोग उनसे डरने लगे हैं ।

  • एक टांग पर खड़ा होना- (काम के लिए तैयार रहना) – जब तक बहन की शादी नहीं हुई वह एक टांग पर खड़ा रहा ।

  • एक लाठी से हाँकना – (सबके साथ एक जैसा व्यवहार करना) – सब लोगों को एक लाठी से हाँकना कोई बुद्धिमानी नहीं है ।

  • एक हाथ से ताली न बजना – (दूसरे के बिना काम न होना) – कभी भी एक हाथ से ताली नहीं बजती गलती तुम दोनों की है ।

ऐ से बनने वाले मुहावरे 

  • ऐसी तैसी करना – (बेईज्जती करना) – सब के समने उसने अपने ही बड़े भाई की ऐसी तैसी कर दी।

 उम्मीद करता हूं कि आप अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा समझ गए होंगे और यह लेख आपको अच्छा लगा होगा



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अ से औ तक कर वर्ण का मुहावरा | A Se Au Tak Muhavare

 muhavare ka arth - मुहावरे का शाब्दिक अर्थ 'अभ्यास' है। जिस मुहावरे से किसी विशेष अर्थ का बोध होता है, उसे मुहावरा कहते हैं। 

मुहावरा एक पूर्ण वाक्य नहीं है इसलिए इसका स्वतंत्र रूप से उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध नहीं कराते हैं, लेकिन कुछ अनोखे अर्थ का आभास कराते हैं, मुहावरे कहलाते हैं। इन विशेष अर्थों को मुहावरे कहा जाता है।

muhavare ka arth bataiye | मुहावरे का अर्थ और वाक्य

हिंदी भाषा में मुहावरों (muhavara) का प्रयोग भाषा को सुंदर, प्रभावशाली ,संक्षिप्त तथा सरल बनाने के लिए किया जाता है। ये वाक्यांश होते हैं। इसका प्रयोग करते समय इसके शाब्दिक अर्थ के स्थान पर इसका विशेष अर्थ लिया जाता है। उनके विशेष अर्थ कभी नहीं बदलते। वे हमेशा एक जैसे रहते हैं।

muhavare meaning in hindi 

इनका प्रयोग वाक्यों में लिंग, शब्द, क्रिया के अनुसार किया जाता है। मुहावरा एक वाक्यांश है जो रचना में अपना विशेष अर्थ बताता है। मुहावरा एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है बात करना या उत्तर देना।


मुहावरे की विशेषताएं:-

  1. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के संदर्भ में अलग से नहीं किया जाता है।
  2. मुहावरा अपना मूल रूप कभी नहीं बदलता। इसका समानार्थी शब्दों में अनुवाद नहीं किया जा सकता है।
  3. मुहावरे का अर्थ नहीं लिया जाता है, केवल उसका विशेष अर्थ ग्रहण किया जाता है।
  4. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार तय किया जाता है।
  5. मुहावरे हिंदी भाषा की समृद्धि और सभ्यता के विकास का पैमाना हैं। इसकी अधिकता या कमी भाषा बोलने वालों के श्रम, भाषा निर्माण की शक्ति, अध्ययन, चिंतन, सभी को एक साथ दर्शाती है। समाज जितना व्यावहारिक और मेहनती होगा, भाषा में उनका उपयोग उतना ही अधिक होगा।
  6. देश और समाज की तरह मुहावरे भी बद से बदतर होते जा रहे हैं। नए समाज के साथ नए मुहावरे आते हैं।
  7. हिंदी भाषा के अधिकांश मुहावरे हमारे शरीर के अंगों से भी जुड़े हुए हैं। वही अन्य भाषाओं के मुहावरों के लिए जाता है।

क्या आप जानते हैं कि मुहावरे और लोकोक्तियों में क्या अंतर होता है चलिए जान लेते हैं

मुहावरे और लोकोक्तियों में अंतर :-

मुहावरा एक वाक्यांश होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता जबकि लोकोक्तियाँ अपने आप में पूर्ण होती हैं। लोकोक्तियों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है।

 उम्मीद करता हूं कि आप मुहावरे का अर्थ तथा उसके विशेषता समझ गए होंगे साथी मुहावरे और लोकोक्तियां में अंतर भी समझ गए होंगे

 muhavare ka arth - मुहावरे का शाब्दिक अर्थ 'अभ्यास' है। जिस मुहावरे से किसी विशेष अर्थ का बोध होता है, उसे मुहावरा कहते हैं। 

मुहावरा एक पूर्ण वाक्य नहीं है इसलिए इसका स्वतंत्र रूप से उपयोग नहीं किया जा सकता है। ऐसे वाक्यांश, जो सामान्य अर्थ का बोध नहीं कराते हैं, लेकिन कुछ अनोखे अर्थ का आभास कराते हैं, मुहावरे कहलाते हैं। इन विशेष अर्थों को मुहावरे कहा जाता है।

muhavare ka arth bataiye | मुहावरे का अर्थ और वाक्य

हिंदी भाषा में मुहावरों (muhavara) का प्रयोग भाषा को सुंदर, प्रभावशाली ,संक्षिप्त तथा सरल बनाने के लिए किया जाता है। ये वाक्यांश होते हैं। इसका प्रयोग करते समय इसके शाब्दिक अर्थ के स्थान पर इसका विशेष अर्थ लिया जाता है। उनके विशेष अर्थ कभी नहीं बदलते। वे हमेशा एक जैसे रहते हैं।

muhavare meaning in hindi 

इनका प्रयोग वाक्यों में लिंग, शब्द, क्रिया के अनुसार किया जाता है। मुहावरा एक वाक्यांश है जो रचना में अपना विशेष अर्थ बताता है। मुहावरा एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है बात करना या उत्तर देना।


मुहावरे की विशेषताएं:-

  1. मुहावरे का प्रयोग वाक्य के संदर्भ में अलग से नहीं किया जाता है।
  2. मुहावरा अपना मूल रूप कभी नहीं बदलता। इसका समानार्थी शब्दों में अनुवाद नहीं किया जा सकता है।
  3. मुहावरे का अर्थ नहीं लिया जाता है, केवल उसका विशेष अर्थ ग्रहण किया जाता है।
  4. मुहावरे का अर्थ प्रसंग के अनुसार तय किया जाता है।
  5. मुहावरे हिंदी भाषा की समृद्धि और सभ्यता के विकास का पैमाना हैं। इसकी अधिकता या कमी भाषा बोलने वालों के श्रम, भाषा निर्माण की शक्ति, अध्ययन, चिंतन, सभी को एक साथ दर्शाती है। समाज जितना व्यावहारिक और मेहनती होगा, भाषा में उनका उपयोग उतना ही अधिक होगा।
  6. देश और समाज की तरह मुहावरे भी बद से बदतर होते जा रहे हैं। नए समाज के साथ नए मुहावरे आते हैं।
  7. हिंदी भाषा के अधिकांश मुहावरे हमारे शरीर के अंगों से भी जुड़े हुए हैं। वही अन्य भाषाओं के मुहावरों के लिए जाता है।

क्या आप जानते हैं कि मुहावरे और लोकोक्तियों में क्या अंतर होता है चलिए जान लेते हैं

मुहावरे और लोकोक्तियों में अंतर :-

मुहावरा एक वाक्यांश होता है जो स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होता जबकि लोकोक्तियाँ अपने आप में पूर्ण होती हैं। लोकोक्तियों का प्रयोग स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है।

 उम्मीद करता हूं कि आप मुहावरे का अर्थ तथा उसके विशेषता समझ गए होंगे साथी मुहावरे और लोकोक्तियां में अंतर भी समझ गए होंगे

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मुहावरा का अर्थ और वाक्य - muhavare ka arth

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